मणिपुर

यौन उत्पीड़न मामले में बिमोल अकोइजम को राहत, सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मंजूर

nidhi
16 Oct 2026 8:59 AM IST
यौन उत्पीड़न मामले में बिमोल अकोइजम को राहत, सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मंजूर
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जेएनयू यौन उत्पीड़न मामले में सात दिन की राहत

इंफाल: इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को स्थानीय अदालत से सात दिनों की 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' (transit anticipatory bail) मिल गई है। इससे उन्हें 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज किए गए यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तारी से अस्थायी राहत मिल गई है।

यह घटनाक्रम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) द्वारा 9 अक्टूबर को अकोइजम को एसोसिएट प्रोफेसर के पद से बर्खास्त किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। मई में 11 छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच की थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
यह FIR वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Security Officer) की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं को लागू किया गया है, जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कार्यों और बिना सहमति के शारीरिक संपर्क से संबंधित हैं।
अकोइजम ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय की जांच और अपनी बर्खास्तगी को अपने खिलाफ एक राजनीतिक साजिश बताया है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया; उन्होंने दावा किया कि बर्खास्तगी से पहले उन्हें जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट नहीं दी गई थी। उन्होंने ईमेल संचार और जांच पैनल के साथ सहयोग करने के बारे में विश्वविद्यालय के दावों को भी गलत बताया है।
सांसद ने अपने खिलाफ हुई इस कार्रवाई को मणिपुर में चल रहे संकट से निपटने के सरकार के तरीके की अपनी आलोचना से जोड़ा है। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और अगर वह दोषी पाए जाते हैं, तो संसद से इस्तीफा दे देंगे।
इस विवाद के कारण 14 अक्टूबर को इंफाल में विरोध प्रदर्शन हुए। नागरिकों के एक बड़े समूह ने धरना दिया और भाजपा के मणिपुर मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश करते हुए पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी।
प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां ले रखी थीं, जिनमें उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के दुरुपयोग का विरोध किया। उन्होंने 'मीडिया ट्रायल' के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की मांग की। डॉ. टीना कुमारी सहित कुछ स्वतंत्र प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों के समय (timing) पर सवाल उठाए और मामले की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे पर JNU के कुलपति (Vice-Chancellor) द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई टिप्पणियों की भी आलोचना की।
अतिरिक्त पुलिस बल के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारियों को भाजपा कार्यालय से दूर हटा दिया गया। इसके बाद, अकोइजम ने केइशमथोंग केइथेल में अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने दोहराया कि वह दिल्ली पुलिस के साथ पूरा सहयोग करेंगे और जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए पेश होंगे। सांसद ने कहा कि वह न तो डरेंगे और न ही उस बात के लिए माफ़ी मांगेंगे जिसे उन्होंने 'व्यवस्थित उत्पीड़न' (सिस्टमैटिक हैरासमेंट) करार दिया है। उन्होंने अपनी कानूनी लड़ाई की तुलना मणिपुर के लोगों की उन ऐतिहासिक शिकायतों से भी की, जो हिरासत के दौरान उनके साथ हुए बर्ताव से जुड़ी हैं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब इन आरोपों, विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई और उचित कानूनी प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) की मांग को लेकर एक व्यापक बहस चल रही है। अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों पर अभी कानूनी कार्यवाही चल रही है।
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