
Manipur मणिपुर: मणिपुर के तामेंगलोंग जिले से एक बेहद खास और दुर्लभ पक्षी माइग्रेशन का मामला सामने आया है, जिसमें रेडियो टैग लगे एक नर अमूर बाज़ “अपापांग” के पूर्वी म्यांमार तक पहुंचने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार यह प्रवास पक्षी विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
रेडियो ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इस बाज़ ने लगभग 95 घंटे की लगातार उड़ान में करीब 4,750 किलोमीटर की दूरी तय की। माना जा रहा है कि इसने 5 मई को सोमालिया से उड़ान शुरू की और बिना रुके अरब सागर पार करते हुए सीधे भारत पहुंचा, जिसके बाद इसका पूर्वी म्यांमार तक का सफर जारी रहा।
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक सुरेश कुमार ने सैटेलाइट सिग्नल के माध्यम से पुष्टि की कि अपापांग 10 मई, रविवार को पूर्वी म्यांमार में पाया गया है। यह जानकारी लगातार ट्रैकिंग के जरिए प्राप्त की गई।
यह ट्रैकिंग प्रोजेक्ट तामेंगलोंग जिले के चिउलुआन गांव में 11 नवंबर 2025 को शुरू किया गया था, जहां तीन अमूर बाज़ों—अपापांग, आहू और अलंग—को सैटेलाइट ट्रांसमीटर से टैग किया गया था। टैगिंग के बाद ही इन पक्षियों ने अपनी लंबी माइग्रेशन यात्रा शुरू कर दी थी।
इन पक्षियों का नाम स्थानीय भूगोल और नदियों बराक और इरांग से प्रेरित होकर रखा गया है। इनमें अपापांग एक वयस्क नर है, जबकि आहू और अलंग मादा अमूर बाज़ हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमूर बाज़ अपनी लंबी दूरी की माइग्रेशन क्षमता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बिना रुके हजारों किलोमीटर की उड़ान अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। इस तरह की ट्रैकिंग से पक्षियों के प्रवास मार्ग, व्यवहार और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डेटा भविष्य में पक्षी संरक्षण और प्रवासी प्रजातियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन और प्रवास मार्गों पर इसके प्रभाव को समझने में भी सहायक होगा।
फिलहाल अपापांग की यह यात्रा वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बन गई है और इसके आगे के मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है।





