मणिपुर

मणिपुर में हत्याओं पर फूटा आक्रोश, हजारों लोगों ने बर्तन बजाकर जताया विरोध

nidhi
24 Oct 2026 6:55 AM IST
मणिपुर में हत्याओं पर फूटा आक्रोश, हजारों लोगों ने बर्तन बजाकर जताया विरोध
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प्रदर्शनकारियों को हटाने आंसू गैस छोड़ी
इंफाल: मणिपुर में लगातार हो रही हत्याओं और लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष के खिलाफ शुक्रवार, 23 अक्टूबर की शाम हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। राज्य के पांच घाटी जिलों में आयोजित इस प्रदर्शन में लोगों ने बर्तन बजाए, ढोल पीटे और वाहनों के हॉर्न बजाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफल रहने का आरोप लगाया। इंफाल में लोक भवन के पास एकत्र लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। शुरुआती रिपोर्ट में किसी के घायल होने की जानकारी नहीं मिली है।
आधे घंटे तक बर्तन और हॉर्न बजाकर विरोध
नागरिक संगठन फेडरेशन ऑफ हाओमी के आह्वान पर शाम साढ़े सात से आठ बजे तक यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंफाल के विभिन्न इलाकों में लोग घरेलू बर्तनों और ढोल के साथ बाहर निकले। कुछ स्थानों पर बिजली के खंभों को हथौड़ों से बजाया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि वे अपनी पीड़ा और असुरक्षा की भावना सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका आरोप था कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। इसी नाराजगी को सामूहिक आवाज के जरिए सामने रखने का प्रयास किया गया।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में युवा मोटरसाइकिलों और कारों से भी सड़कों पर निकले। लगातार हॉर्न बजाते वाहनों और लोगों की भीड़ के कारण राजधानी के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। इंफाल और आसपास के इलाकों में एक साथ उठती आवाजों ने प्रदर्शन को व्यापक स्वरूप दिया। घरों के आसपास विरोध जताने वालों के साथ सड़कों पर निकले समूह भी इसमें शामिल हुए। इस तरह आंदोलन में अलग-अलग स्थानों से लोगों की भागीदारी दिखाई दी और शाम के समय राजधानी के कई हिस्सों में विरोध की गूंज सुनाई दी।
कांगला की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान कई समूह ऐतिहासिक कांगला परिसर की ओर बढ़े। यह स्थान मणिपुर के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। सुरक्षा बलों ने पैलेस कंपाउंड, मोइरांगखोम और केइशमपाट जंक्शन पर प्रदर्शनकारियों को रोका। इसके बावजूद सैकड़ों लोग कांगला के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए, जहां उन्हें भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में लोक भवन के आसपास जुटी भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रात आठ बजे के बाद वहां बैरिकेड भी लगाए गए।
सुरक्षा के साथ कई राजनीतिक मांगें भी उठीं
प्रदर्शनकारियों की मांगों में राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू करना, कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करना और सशस्त्र समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते को समाप्त करना शामिल था। उन्होंने लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष का समाधान नहीं निकलने पर भी नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के विधानसभा क्षेत्र सिंगजमेई में भी लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इन मांगों के साथ प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सुरक्षा और शांति बहाली के संबंध में निर्णायक कदम उठाने को कहा। हालांकि, इन मांगों पर किसी नए सरकारी फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
तीन ग्रामीणों की हत्या के बाद बढ़ा तनाव
ताजा विरोध की पृष्ठभूमि में 19 अक्टूबर को तीन मैतेई ग्रामीणों की हत्या की घटना भी है। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीणों का एक समूह जंगल में जलावन की लकड़ियां एकत्र कर रहा था, तभी अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने गोलीबारी की। इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई और तीन अन्य घायल हुए। घटना इंफाल ईस्ट और कांगपोकपी से लगे सीमावर्ती क्षेत्र में हुई थी। इसके बाद इंफाल में नाराज लोगों ने दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री आवास के बाहर रखकर विरोध जताया था। उस समय भी भीड़ हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था।
हत्याओं के विरोध में इससे पहले घाटी के जिलों में बंद और धरना-प्रदर्शन भी हुए। मंगलवार को 48 घंटे के बंद के कारण दुकानों, बाजारों, शिक्षण संस्थानों तथा सरकारी और निजी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हुआ था। बुधवार को मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम स्थल के बाहर भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबर आई थी। इस घटनाक्रम के बाद शुक्रवार का सामूहिक प्रदर्शन सामने आया। लगातार हो रहे विरोध से स्पष्ट है कि हालिया हत्याओं को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी बनी हुई है और सुरक्षा के भरोसे की मांग प्रमुख है।
सरकार ने सुरक्षा मजबूत करने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए थे। सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद संबंधित क्षेत्र में संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, निगरानी के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया तथा मोबाइल जांच चौकियां स्थापित की गईं। मुख्यमंत्री ने घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने का भरोसा भी दिया। शुक्रवार को गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने कहा कि हत्याओं में शामिल संदिग्धों को पकड़ने के लिए अभियान जारी है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी ठोस परिणाम और सामान्य जीवन की बहाली की मांग कर रहे हैं। The Times of India
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