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Imphal इंफाल। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की आधुनिकीकरण की दिशा में की गई प्रगति और स्वदेशी क्षमताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां आतंकवाद के प्रति देश के शून्य-सहिष्णुता वाले रुख और अटूट संकल्प को दर्शाती हैं। मणिपुर स्टेट फिल्म डेवलपमेंट सोसाइटी (एमएसएफडीएस) के सभागार में आयोजित विजय दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत और उस जीत के पीछे सैनिकों के अदम्य साहस व बलिदान की स्मृति का प्रतीक है। उन्होंने सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की एकता व अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को नमन किया।
राज्यपाल भल्ला ने मणिपुर के वीर सपूतों की बहादुरी को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक (विर चक्र), बीएसएफ के कांस्टेबल दीपक चिंगाखम (मरणोपरांत विर चक्र) और सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जेफ्री ह्मिंगचुल्लो हमार (शौर्य चक्र) के साहस और बलिदान की सराहना की, जिन्होंने राज्य और देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय एकता की रक्षा, शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक संकल्प दोहराने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल सहित प्रशासन, पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक, छात्र और आम नागरिक उपस्थित रहे।
इस बीच विजय दिवस पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी मनाया गया। असम में गुवाहाटी के डिघाली पुखुरी स्थित राज्य युद्ध स्मारक पर सैनिक कल्याण निदेशालय के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) प्रणब कुमार भराली थे। 1971 युद्ध के दिग्गज मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) पूर्णानंद दास, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अबनी कुमार पैत, कर्नल (सेवानिवृत्त) रॉबिन दास और मेजर (सेवानिवृत्त) बीरेन बोरगोहेन ने युद्ध के अपने अनुभव साझा किए। सभी पूर्व सैनिकों को ‘फूलाम गमोछा’ भेंट कर सम्मानित किया गया।
विजय दिवस के साथ-साथ “अमर शहीद श्रद्धांजलि” कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान वीर नारियों आकान बोरो और बिष्णु प्रवा चेत्री को सम्मानित किया गया, जिनके पति हवलदार रामधन बोरो (सेना मेडल) और सूबेदार तिलक बहादुर चेत्री जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। वीर नारियों ने अपने शहीद पतियों की स्मृति में युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्हें शहीदों के चित्रों की पेंसिल स्केच, असमिया भाषा में लिखी वीरता की कथा, तथा हिंदी और अंग्रेज़ी में उनकी शौर्यगाथा का विवरण सौंपा गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, एनसीसी कैडेट्स और स्कूली छात्र उपस्थित रहे।
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