मणिपुर

मणिपुर में हिंसा का नया दौर दो दिनों में दर्जनों घर खाक

Ratna Netam
2 Sept 2026 8:02 PM IST
मणिपुर में हिंसा का नया दौर दो दिनों में दर्जनों घर खाक
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इंफाल। लंबे समय से जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। कांगपोकपी जिले में लगातार दूसरे दिन घरों को आग के हवाले किए जाने की घटना सामने आई है। मंगलवार को तीन लियांगमई नागा गांवों में कम से कम 10 घर जलाए जाने के बाद बुधवार को **टिपोराम गांव में 25 और घरों में आग लगा दी गई**। स्थानीय लोगों के मुताबिक बुधवार को जलाए गए घरों में पांच मकान नेपाली समुदाय के लोगों के थे। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है।
लगातार हो रही हिंसा को केवल दो दिनों की घटनाओं के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इससे पहले सोमवार को कांगपोकपी के **तेइखांग कुकी गांव** में हथियारबंद लोगों ने हमला किया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में दो महिलाएं शामिल थीं, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे। इसके बाद मंगलवार को लियांगमई नागा गांवों पर हमला और बुधवार को फिर आगजनी की घटना ने इलाके में तनाव को बेहद गंभीर बना दिया है।
बुधवार को 25 घरों में लगाई गई आग
ताजा घटना बुधवार को कांगपोकपी जिले के टिपोराम गांव में सामने आई। पुलिस के अनुसार कम से कम 25 मकानों को आग के हवाले कर दिया गया।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इन 25 घरों में से **पांच मकान नेपाली समुदाय के परिवारों के थे**। आग लगाने के बाद हमलावर इलाके से चले गए।
टिपोराम के ग्रामीणों को पहले हुई हिंसा के बाद गांव से निकालकर करीब 15 किलोमीटर दूर मकुई इलाके में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण मंगलवार को वापस लौटे थे, लेकिन इसके बाद फिर गोलीबारी की घटना हुई।
स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों को घरों में आग लगाए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से भी इस पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
एक दिन पहले 10 घरों में लगी थी आग
बुधवार की घटना से महज एक दिन पहले मंगलवार तड़के करीब चार बजे तीन लियांगमई नागा गांवों—**टापन खुल्लेन, टापन खुनौ और मकुई पिपुराम**—पर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने हमला किया था।
पुलिस के शुरुआती आकलन में कम से कम 10 घर जलाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा एक एक्सकेवेटर, जिप्सी, पिकअप और ट्रक सहित कई वाहनों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में नुकसान की संख्या अलग बताई गई है। इंडिया टुडे ने अधिकारियों के हवाले से लगभग 30 घरों के क्षतिग्रस्त या जलने की जानकारी दी थी। पुलिस ने भी कहा था कि नुकसान का अंतिम आकलन किया जा रहा है। इसलिए मंगलवार की घटना में **कम से कम 10 घर जलने की पुलिस-पुष्ट संख्या** को आधार मानना ज्यादा सावधानीपूर्ण है।
पादरी को लगी गोली
मंगलवार के हमले के दौरान गोलीबारी भी हुई।
पुलिस ने घायल व्यक्ति की पहचान **49 वर्षीय एन. लुइथुइबोउ** के रूप में की। उनके पेट के दाहिने हिस्से और हाथ में गोली लगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह गांव के चर्च में पादरी हैं।
हमले के बाद इलाके में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। पुलिस के मुताबिक फायरिंग दोपहर करीब 12:30 बजे तक जारी रही।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF, उसकी विशेष **CoBRA यूनिट** और मणिपुर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को मौके पर भेजा गया। इसके बाद आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया गया।
सोमवार को तीन कुकी ग्रामीणों की हुई थी हत्या
कांगपोकपी में हिंसा का मौजूदा दौर सोमवार यानी 31 अगस्त को हुई एक बड़ी घटना के बाद और गंभीर हुआ।
सोमवार सुबह हथियारबंद हमलावरों ने **एन तेइखांग कुकी गांव** को निशाना बनाया। हमले में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए। मृतकों में दो महिलाएं शामिल थीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय और पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे बड़ी संख्या में हथियारबंद हमलावरों ने गांव पर हमला किया। गोलीबारी के साथ कुछ घरों को भी आग के हवाले किया गया।
इसके अगले ही दिन नागा बहुल गांवों पर हमला हुआ। इसी कारण अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच यह चिंता बढ़ी कि कहीं एक घटना के बाद दूसरी घटना **बदले की हिंसा के चक्र** का हिस्सा तो नहीं बन रही।
हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर हालिया हमलों को एक-दूसरे का बदला घोषित नहीं किया है।
27 अगस्त को चार नागा ग्रामीणों की हुई थी मौत
इलाके में तनाव की शुरुआत केवल 31 अगस्त से नहीं हुई।
इससे कुछ दिन पहले **27 अगस्त** को इंफाल-तामेंगलॉन्ग रोड के आसपास हुए एक हमले में चार नागा नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद 31 अगस्त को तीन कुकी नागरिक मारे गए और फिर नागा गांवों पर हमले की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस के मुताबिक 13 मई के बाद से कुकी-जो और नागा पक्षों से जुड़े अलग-अलग हिंसक मामलों में **17 लोगों की मौत** हो चुकी है।
यानी कांगपोकपी और तामेंगलॉन्ग के आसपास का क्षेत्र इस समय केवल पुराने मैतेई-कुकी संघर्ष की वजह से संवेदनशील नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच हालिया हमलों ने सुरक्षा चुनौती को और जटिल बना दिया है।
किसने किए हमले?
यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल है।
अलग-अलग स्थानीय संगठनों और ग्राम प्राधिकरणों ने प्रतिद्वंद्वी समुदाय से जुड़े हथियारबंद समूहों पर आरोप लगाए हैं। उदाहरण के लिए मकुई विलेज अथॉरिटी ने मंगलवार के हमले के लिए कथित कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया।
लेकिन पुलिस की आधिकारिक जानकारी में हमलावरों को **अज्ञात हथियारबंद व्यक्ति** बताया गया है।
हालिया हमलों की जिम्मेदारी भी किसी संगठन ने आधिकारिक रूप से नहीं ली है।
इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी विशेष समुदाय या संगठन को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
इम्फाल-तामेंगलॉन्ग रोड क्यों महत्वपूर्ण?
जिस क्षेत्र में हालिया हिंसा हुई है वह इम्फाल-तामेंगलॉन्ग रोड के आसपास स्थित है। यह मार्ग नागा बहुल इलाकों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
टापन खुल्लेन, टापन खुनौ और मकुई पिपुराम जैसे प्रभावित गांव इसी रणनीतिक कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं।
लगातार हिंसा की वजह से सड़क संपर्क, ग्रामीण आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
इसी कारण सुरक्षा बल केवल प्रभावित गांवों में ही नहीं बल्कि आसपास के रास्तों और संवेदनशील इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रहे हैं।
2023 से हिंसा में 260 से ज्यादा मौतें
मणिपुर में व्यापक जातीय हिंसा **मई 2023** में शुरू हुई थी। शुरुआत मुख्य रूप से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई, लेकिन लंबे समय तक चले तनाव का असर राज्य के दूसरे समुदायों और क्षेत्रों पर भी पड़ा।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक 2023 से चली हिंसा में **कम से कम 260 लोगों की मौत** हो चुकी है और लगभग **60 हजार लोग विस्थापित** हुए हैं।
मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहता है, जबकि कुकी-जो समुदाय की बड़ी आबादी पहाड़ी जिलों में है। हिंसा के बाद दोनों समुदायों के बीच भौगोलिक और सामाजिक दूरी काफी बढ़ गई।
अब कांगपोकपी क्षेत्र में नागा और कुकी समुदायों से जुड़े लोगों की मौत और गांवों पर हमले ने शांति बहाली की प्रक्रिया को और कठिन बना दिया है।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती
मणिपुर में फरवरी 2026 में नई सरकार बनी थी। इसमें प्रमुख समुदायों का प्रतिनिधित्व देकर जातीय संतुलन बनाने और लंबे समय से जारी हिंसा के बाद सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश की गई।
लेकिन अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में सामने आई हिंसा ने दिखाया है कि जमीन पर स्थिति अभी भी बेहद नाजुक है।
कुछ दिनों के भीतर चार नागा नागरिकों की हत्या, तीन कुकी ग्रामीणों की मौत, एक ग्रामीण को गोली लगना और दर्जनों मकानों को जलाया जाना सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती है।
अब सुरक्षा बलों पर हिंसा रोकने की जिम्मेदारी
कांगपोकपी में CRPF, CoBRA और मणिपुर पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। प्रभावित गांवों और आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी है।
सबसे बड़ी चुनौती अब जवाबी हिंसा को रोकने की है। हालिया घटनाओं में अलग-अलग समुदायों के लोग मारे गए हैं और संपत्तियां जलाई गई हैं। ऐसे में किसी नई घटना से तनाव तेजी से दूसरे गांवों तक फैल सकता है।
इस समय यह स्थापित नहीं हुआ है कि सोमवार, मंगलवार और बुधवार की सभी घटनाओं के पीछे एक ही समूह है या वे सीधे तौर पर एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। पुलिस जांच के बाद ही इसकी तस्वीर साफ होगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि **कांगपोकपी में लगातार तीन दिनों में हुई हिंसा ने मणिपुर की शांति प्रक्रिया को गंभीर झटका दिया है।** पहले जानलेवा हमला, फिर नागा गांवों में आगजनी और अगले दिन 25 और घर जलाए जाने से इलाके में डर का माहौल है।
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—हमलावरों की पहचान कर कार्रवाई करना और यह सुनिश्चित करना कि किसी समुदाय के खिलाफ जवाबी हिंसा न भड़के। तीन साल से अधिक समय से हिंसा का दर्द झेल रहे मणिपुर के लिए कांगपोकपी की ये घटनाएं चेतावनी हैं कि स्थायी शांति के लिए केवल सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं, बल्कि समुदायों के बीच विश्वास बहाली और हथियारबंद समूहों पर प्रभावी नियंत्रण भी जरूरी है।
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