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साहित्य में नई आवाज बनकर उभरा ‘मिवा’
इंफाल: मणिपुर की क्वीर समुदाय की भावनाओं, पहचान और लंबे समय से अनकही रह गई बातों को कविता के जरिए सामने लाने वाला कविता संग्रह ‘मिवा’ चर्चा में है। इसे मणिपुर का पहला क्वीर कविता संग्रह बताया जा रहा है। यह संग्रह प्रेम, पहचान, स्वीकार्यता और समाज के बीच अपनी जगह तलाशने जैसे अनुभवों को शब्द देता है।
‘मिवा’ की खासियत यह है कि इसमें क्वीर जीवन को केवल संघर्ष के नजरिए से नहीं देखा गया है। कविताओं में व्यक्तिगत भावनाओं, रिश्तों, अकेलेपन, उम्मीद और अपने अस्तित्व को स्वीकार करने जैसे विषयों को भी जगह दी गई है। संग्रह उन अनुभवों को सामने लाने की कोशिश करता है जिन पर परिवार और समाज में अक्सर खुलकर बातचीत नहीं होती। कई लोगों के लिए अपनी लैंगिक या यौन पहचान से जुड़ी भावनाओं को व्यक्त करना आसान नहीं होता। ऐसे में साहित्य अभिव्यक्ति का एक माध्यम बन सकता है।
‘मिवा’ के जरिए कविताओं में उन आवाजों को स्थान देने का प्रयास किया गया है, जो मुख्यधारा के साहित्य में अपेक्षाकृत कम दिखाई देती हैं। इसमें व्यक्तिगत अनुभवों के साथ सामाजिक परिस्थितियों और स्वीकार्यता से जुड़े सवाल भी उभरते हैं। कविता संग्रह का महत्व मणिपुर की स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत में अलग-अलग भाषाओं और समुदायों की समृद्ध साहित्यिक परंपरा रही है। अब क्वीर अनुभवों से जुड़ी रचनाएं भी इस साहित्यिक संवाद का हिस्सा बन रही हैं।
साहित्य में पहचान से जुड़े विषयों पर लिखना लेखकों के लिए अपनी भावनाओं को सामने रखने का माध्यम होने के साथ पाठकों को अलग-अलग जीवन अनुभवों को समझने का अवसर भी देता है। ‘मिवा’ इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आया है।
कविताओं के जरिए प्रेम, अस्वीकार किए जाने का डर, सामाजिक दबाव और अपनी पहचान को स्वीकार करने की यात्रा जैसे पहलुओं को अभिव्यक्ति मिलती है। इसमें ऐसे अनुभव भी शामिल हैं जिन्हें रोजमर्रा की बातचीत में कहना कठिन हो सकता है। यह संग्रह क्वीर समुदाय को लेकर संवाद बढ़ाने की दिशा में साहित्य की भूमिका को भी रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के निजी अनुभव जब कविता का रूप लेते हैं तो वे केवल व्यक्तिगत कहानी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज के सामने कई नए सवाल भी रखते हैं।
‘मिवा’ का सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि क्षेत्रीय साहित्य में अलग-अलग पहचान और अनुभवों के लिए जगह बढ़ रही है। यह संग्रह उन भावनाओं को शब्द देता है जो लंबे समय तक अनकही रह सकती हैं। कविता संग्रह के जरिए यह संदेश उभरता है कि साहित्य में हर तरह के अनुभव और पहचान के लिए स्थान हो सकता है। ‘मिवा’ इसी साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से मणिपुर में क्वीर समुदाय की अनकही बातों और भावनाओं को आवाज देने की कोशिश करता है।
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