मणिपुर

मणिपुर में UAPA सेक्शन 43A नोटिफिकेशन पर विवाद, मानवाधिकार समूह ने वापसी की मांग की

Harrison
23 April 2026 7:14 PM IST
मणिपुर में UAPA सेक्शन 43A नोटिफिकेशन पर विवाद, मानवाधिकार समूह ने वापसी की मांग की
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Imphal इंफाल: मणिपुर में अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी UAPA के सेक्शन 43A को लागू करने के सरकारी नोटिफिकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राज्य के एक प्रमुख अधिकार समूह यूथ्स फोरम फॉर प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स (YFPHR) ने इस कदम पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
YFPHR ने कहा है कि इस प्रकार के प्रावधानों का उपयोग नागरिक अधिकारों और मानवाधिकारों पर असर डाल सकता है। संगठन का मानना है कि सेक्शन 43A से जुड़ा यह नोटिफिकेशन राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लोगों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए।
मणिपुर सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए इस नोटिफिकेशन के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों का कहना है कि इस तरह के कानूनों के लागू होने से आम नागरिकों पर अतिरिक्त निगरानी और कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
YFPHR ने अपने बयान में कहा कि किसी भी सुरक्षा कानून का उपयोग संतुलित और न्यायपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों के अधिकार प्रभावित न हों। संगठन ने यह भी कहा कि मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसे निर्णयों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।
इस मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि UAPA जैसे सख्त कानून पहले से ही देश में विवाद का विषय रहे हैं। ऐसे में नए प्रावधानों को लागू करने से पहले उनके प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।
सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सेक्शन 43A के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों को अधिक अधिकार मिल सकते हैं, जिससे जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस पर सरकार की ओर से अभी विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राज्य में इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इससे नागरिक स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इसलिए किसी भी कानूनी बदलाव को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय लेना जरूरी होता है।
YFPHR ने मांग की है कि सरकार इस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस ले और सभी हितधारकों के साथ बातचीत के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संवाद सबसे महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर आधिकारिक बयान जारी किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, UAPA सेक्शन 43A को लेकर मणिपुर में शुरू हुआ यह विवाद अब मानवाधिकार बनाम सुरक्षा नीति की बहस का रूप लेता जा रहा है।
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