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Manipur मणिपुर: मणिपुर में 2 मई को हुई जातीय हिंसा के दौरान लापता हुए लोगों के परिजनों ने प्रशासन से अपने प्रियजनों की तलाश के प्रयास तेज़ करने की अपील की है। परिवारों का कहना है कि जब तक लापता लोग नहीं मिलते, तब तक उन्हें न्याय और सम्मान नहीं मिल सकता।
मणिपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि यह अनिश्चितता और इंतजार का दर्द लगभग तीन वर्षों से जारी है। यह स्थिति 3 मई 2023 को शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद से बनी हुई है, जिसके बाद कई लोग लापता हो गए थे।
परिवारों के सदस्यों ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी उनके प्रियजनों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि खोज और जांच की प्रक्रिया को और तेज किया जाए, ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिजनों ने यह भी बताया कि लगातार इंतजार और अनिश्चितता के कारण उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर गहरा असर पड़ा है। कई परिवार अब भी इस उम्मीद में हैं कि उनके प्रियजन सुरक्षित मिल जाएंगे।
उन्होंने कहा कि लापता लोगों की खोज केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मानवीय जिम्मेदारी भी है। जब तक सभी लापता लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक प्रभावित परिवारों को पूरी तरह से राहत नहीं मिल सकती।
परिजनों ने यह भी मांग की कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता दे और विशेष टीमों का गठन कर खोज अभियान को तेज करे। साथ ही, उन्होंने पारदर्शिता और नियमित अपडेट की भी आवश्यकता बताई, ताकि परिवारों को स्थिति की सही जानकारी मिलती रहे।
मणिपुर में 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद से कई इलाकों में हिंसा और अशांति की घटनाएं सामने आई थीं। इस दौरान कई लोग विस्थापित हुए और कुछ लोग लापता भी हो गए, जिनकी तलाश अब तक जारी है।
प्रशासन की ओर से समय-समय पर खोज अभियान चलाए जाने की जानकारी दी जाती रही है, लेकिन परिजनों का कहना है कि इन प्रयासों को और प्रभावी और तेज बनाने की जरूरत है। उनका मानना है कि समन्वित और केंद्रित प्रयासों से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी चिंता जताई है और सरकार से अपील की है कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, मणिपुर हिंसा में लापता लोगों के परिजन अब भी अपने प्रियजनों के लौटने की उम्मीद में हैं और प्रशासन से लगातार यह मांग कर रहे हैं कि खोज अभियान को तेज किया जाए, ताकि लंबे समय से जारी इस अनिश्चितता का अंत हो सके।
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