मणिपुर
Manipur : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी मांगी
Mohammed Raziq
4 April 2025 12:26 PM IST

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New Delhi नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी के लिए लोकसभा में एक वैधानिक संकल्प पेश किया। इसके बाद निचले सदन ने इस संकल्प को पारित कर दिया। सदन ने मणिपुर में हुई हिंसा में जान गंवाने वालों के प्रति सम्मान, सहानुभूति और गहरा दुख भी व्यक्त किया। प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में दो समुदायों के बीच जातीय हिंसा आरक्षण संबंधी विवाद को लेकर मणिपुर उच्च न्यायालय के फैसले के कारण शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि यह न तो दंगा है और न ही आतंकवाद, बल्कि उच्च न्यायालय के फैसले की व्याख्या के परिणामस्वरूप दो समुदायों के बीच जातीय हिंसा है। शाह ने आगे कहा कि दिसंबर से मार्च तक करीब चार महीने तक मणिपुर में कोई हिंसा नहीं हुई है और शिविरों में भोजन, दवा और चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है और प्राथमिक शिक्षा के लिए शिविरों के अंदर कक्षाएं लगाई गई हैं, जहां उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। अमित शाह ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए और जातीय हिंसा को किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने यह छवि पेश करने की कोशिश की कि हमारे शासन के दौरान जातीय हिंसा हुई। उन्होंने सदन को बताया कि 1993 से 1998 के बीच मणिपुर में पांच साल तक नागा-कुकी संघर्ष चला, जिसके परिणामस्वरूप 750 मौतें हुईं और एक दशक तक छिटपुट घटनाएं होती रहीं। शाह ने जोर देकर कहा कि हमारा मानना है कि हमारे शासन में ऐसी घटनाएं कभी नहीं होनी चाहिए, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसले के कारण हिंसा हुई, जिसे तुरंत नियंत्रित कर लिया गया। उन्होंने कहा कि हिंसा में 260 मौतों में से 80 फीसदी पहले महीने में हुईं, जबकि बाकी मौतें अगले महीनों में हुईं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 1997-98 के कुकी-पाइते संघर्ष में 50 से अधिक गांव नष्ट हो गए, 40,000 लोग विस्थापित हुए, 352 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 5,000 घर जला दिए गए। उन्होंने आगे कहा कि 1993 में छह महीने तक चले मैतेई-पंगल संघर्ष में 100 से अधिक मौतें हुई थीं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष ऐसी तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहा है जैसे मणिपुर में यह पहली हिंसा है और हमारी सरकार विफल हो गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछली सरकार के शासन के दौरान हिंसा की तीन बड़ी घटनाएं- 10 साल, 3 साल और 6 महीने- हुई थीं।
अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद दोनों समुदायों के साथ चर्चा की गई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें हुई हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि गृह मंत्रालय जल्द ही एक संयुक्त बैठक बुलाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार हिंसा को समाप्त करने का रास्ता खोजने के लिए काम कर रही है, लेकिन सर्वोच्च प्राथमिकता शांति स्थापित करना है। (पीआईबी)
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