मणिपुर

Manipur : खोंगजोम दिवस पर 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

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23 April 2026 4:49 PM IST
Manipur : खोंगजोम दिवस पर 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
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Manipur मणिपुर: मणिपुर ने गुरुवार को खोंगजोम दिवस पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया। यह दिन 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के वीर शहीदों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने राज्य की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन थौबल जिले के खोंगजोम युद्ध स्मारक परिसर में किया गया, जहां राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया।

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने खेबा पहाड़ी स्थित स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, राज्य के मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर उन वीरों को नमन किया जिन्होंने मणिपुर की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति और सम्मान की भावना से भरा रहा। समारोह में पारंपरिक सैन्य सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके साथ ही जनरल सैल्यूट, रिवर्स आर्म्स और लास्ट पोस्ट की धुन बजाई गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद बंदूकों की सलामी भी दी गई, जिसने समारोह को और अधिक औपचारिक और गरिमामय बना दिया।इस अवसर पर राज्यपाल

ने खेबा की तलहटी में स्थित पाओना ब्रजबाशी की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने ऐतिहासिक युद्ध में पाओना ब्रजबाशी की भूमिका को याद करते हुए उनके साहस और बलिदान को सम्मानित किया। यह स्मरण समारोह मणिपुर के इतिहास में उनके योगदान को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रस्में भी निभाई गईं। राज्यपाल और अन्य गणमान्य लोगों ने खोंगजोम नदी पर तारपोन चढ़ाया और संकीर्तन में भाग लिया। इन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों ने कार्यक्रम को परंपरा और संस्कृति से जोड़ दिया।

इस पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में मणिपुर के इतिहास, संस्कृति और वीरता की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

खोंगजोम दिवस का यह आयोजन न केवल शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य अपने इतिहास और वीर गाथाओं को आज भी पूरे गर्व के साथ याद करता है। प्रशासन और जनता की संयुक्त भागीदारी ने इस दिवस को और अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बना दिया।

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