मणिपुर

Manipur : हिंसा से जुड़े ऑडियो मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

Kavita2
1 May 2026 4:36 PM IST
Manipur : हिंसा से जुड़े ऑडियो मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
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Manipur मणिपुर: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 30 अप्रैल को एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की नए सिरे से फोरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को 2023 में हुए जातीय दंगों से जोड़ने का दावा किया गया है। यह मामला मणिपुर हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिका में राज्य में हुई हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात स्थित नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) को निर्देश दिया है कि वह इस ऑडियो क्लिप की विस्तृत जांच करे और वॉयस कम्पेरिजन टेस्ट भी करे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की है या नहीं।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पूरी रिकॉर्डिंग, जो दो घंटे से अधिक लंबी बताई जा रही है, सभी पक्षों के साथ साझा की जाए और फोरेंसिक जांच के लिए संस्थान को भेजी जाए। इसे एक पेन ड्राइव में सुरक्षित रखा गया है, जिसे प्राथमिक साक्ष्य माना जाएगा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि 2 घंटे 36 मिनट की पूरी रिकॉर्डिंग मूल स्रोत से पेन ड्राइव में ट्रांसफर की गई है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस पेन ड्राइव को संबंधित पक्ष को भी उपलब्ध कराया जाए और NFSU में वॉयस सैंपल के साथ इसकी तुलना की जाए।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक एजेंसी को यह भी जांच करने के लिए कहा है कि क्या ऑडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग, कटिंग या छेड़छाड़ की गई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या रिकॉर्डिंग वास्तव में किसी मूल और प्रमाणिक आवाज से मेल खाती है या नहीं।

यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में फोरेंसिक जांच के आदेश दिए गए हैं। इससे पहले 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 48 मिनट की एक अन्य ऑडियो क्लिप की जांच का निर्देश दिया था और सभी संबंधित रिकॉर्डिंग को एक साथ जांचने के लिए कहा था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जांच के बाद पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए।

दिसंबर में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि जांच के लिए केवल कुछ हिस्से ही भेजे गए थे और पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया था।

वहीं, NFSU ने पहले ही संकेत दिया था कि लीक हुई ऑडियो फाइलों में संभावित हेरफेर के संकेत मिले हैं और वे वॉयस विश्लेषण के लिए पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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