मणिपुर

मणिपुर समर कैम्प: 500+ बच्चे बने 'बाइबल स्कूल' का हिस्सा

Tara Tandi
25 Oct 2026 7:32 PM IST
मणिपुर समर कैम्प: 500+ बच्चे बने बाइबल स्कूल का हिस्सा
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मणिपुर: इम्फाल में MBC सेंटर चर्च द्वारा तीन दिवसीय 'वेकेशन बाइबल स्कूल' (VBS) का आयोजन किया गया, जिसमें 500 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम की थीम "ईश्वर की आँखों का तारा" (Apple of God’s Eye) थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्म-मूल्य, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देना था।
रविवार को संपन्न हुए इस कार्यक्रम में इम्फाल और उसके आसपास के विभिन्न स्कूलों के बच्चे शामिल हुए। इसमें ऐसी गतिविधियाँ कराई गईं, जो एकता, क्षमा, सहयोग और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देती हैं।
MBC सेंटर चर्च के संडे स्कूल की स्टाफ सदस्य, वांडा जाजो ने बताया कि यह कार्यक्रम हर साल दुर्गा पूजा की छुट्टियों के दौरान आयोजित किया जाता है। इसका मकसद बच्चों को अपनी छुट्टियों का उपयोग बाइबल की शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों को सीखने में करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने बताया कि VBS 2026 के लिए 500 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इसमें नर्सरी से लेकर कक्षा 10 और उससे ऊपर की कक्षाओं के छात्र शामिल
थे।
बच्चों को उनकी उम्र और सीखने के स्तर के आधार पर बिगिनर, प्राइमरी, जूनियर, इंटरमीडिएट और सीनियर समूहों में बांटा गया था।
यह कार्यक्रम 19 अक्टूबर को शुरू हुआ था, लेकिन दो दिनों के पूर्ण बंद (शटडाउन) के कारण इसे कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। 24 अक्टूबर को यह फिर से शुरू हुआ और 25 अक्टूबर को समापन समारोह आयोजित किया गया।
इस थीम के बारे में बताते हुए जाजो ने कहा कि यह बाइबल के 'भजन संहिता 17:8' (Psalm 17:8) पर आधारित है, जिसमें 'ईश्वर की आँखों का तारा' होने का जिक्र है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य संदेश बच्चों को उनके अपने मूल्य को समझने में मदद करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उनमें हीन भावना को दूर करना था।
उन्होंने कहा, "हम बच्चों और उनके माता-पिता को यह संदेश देना चाहते हैं कि न केवल बच्चे, बल्कि हम सभी ईश्वर की नजर में बहुत खास हैं। हम सब अनमोल हैं।"
जाजो ने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों को उनके मूल्य के बारे में याद दिलाएं और उन्हें अच्छे कार्यों तथा ईश्वर से डरने वाले (ईश्वर-भक्त) जीवन की ओर प्रेरित करें।
आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले बच्चों के बीच एकता, क्षमा और आपसी समझ को बढ़ावा देना भी था।
इस वार्षिक पहल का मकसद धार्मिक शिक्षा को चरित्र निर्माण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की सीख के साथ जोड़कर, स्कूली छुट्टियों को सार्थक बनाना है।
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