
Manipur मणिपुर: मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सामाजिक संगठनों द्वारा लगाए गए बंद और आर्थिक नाकेबंदी के कारण राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की भारी कमी जैसी स्थिति बन गई है। इस बंद का व्यापक असर परिवहन व्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ा है।
पूरी तरह से बंद के चलते सड़क यातायात लगभग ठप हो गया है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग-102 (NH-102) पर करीब 600 ट्रक फंसे हुए हैं। यह मार्ग इंफाल को कोहिमा के रास्ते गुवाहाटी से जोड़ता है और राज्य की सप्लाई चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फंसे हुए वाहनों में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से लदे टैंकर भी शामिल हैं।
इसके अलावा, फ्यूल और एलपीजी ले जा रहे 100 से अधिक टैंकर नोनी क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिससे इंफाल-सिलचर रूट पर भी आवागमन बाधित हो गया है। इस वजह से राज्य के कई हिस्सों में ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है और बाजारों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
यह बंद कुकी इंपी मणिपुर (KIM) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) द्वारा 13 मई को कांगपोकपी और नोनी जिलों में हुई हिंसक घटनाओं के बाद लागू किया गया है। इन घटनाओं में तीन थाडू चर्च नेताओं और एक नागा व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि पांच अन्य लोग घायल हुए थे।
घटनाओं के बाद दोनों संगठनों ने विरोध स्वरूप आर्थिक नाकेबंदी और बंद का आह्वान किया, जिसका असर अब पूरे राज्य की आपूर्ति व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, बंद के चलते सप्लाई चेन बाधित होने से आम जनता को पेट्रोलियम उत्पादों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक जारी बंद से न केवल ईंधन आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
कुल मिलाकर, मणिपुर में जारी तनाव और बंद ने राज्य की परिवहन और सप्लाई व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे आम जनजीवन पर सीधा असर देखने को मिल रहा है।





