मणिपुर

मणिपुर: गोलीबारी की खबर के बाद घरों में आगजनी

Tara Tandi
8 Oct 2026 3:22 PM IST
मणिपुर: गोलीबारी की खबर के बाद घरों में आगजनी
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इम्फाल: बुधवार दोपहर कांगपोकपी-सेनापति बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया। खबर है कि अज्ञात लोगों ने कैलेनजंग गांव में तीन खाली घरों में आग लगा दी, जबकि इलाके में गोलीबारी की भी सूचना मिली थी।
स्थानीय और सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह घटना दोपहर करीब 2:30 बजे हुई। इससे कुछ देर पहले ही गांव के लोगों ने गोलीबारी की आवाज़ सुनी थी।
किसी के हताहत होने की खबर नहीं है क्योंकि घर पहले ही खाली कर दिए गए थे। हालांकि, आग से घर जलकर खाक हो गए और अंदर छोड़े गए ज़रूरी दस्तावेज़ और अन्य सामान भी जल गए या नष्ट हो गए।
इलाके में सुरक्षा बहाल करने के लिए सेनापति ज़िला पुलिस और सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के जवानों को तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आस-पास पहले से ही CRPF की दो प्लाटून तैनात थीं।
कैलेनजंग 26 सितंबर से ही लगभग वीरान पड़ा है। उस दिन तीन नागा नागरिकों - रॉकी माओ, कुमार पौमई और आशीहो सानी - की हत्या कर दी गई थी। यह हमला कथित तौर पर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने किया था।
सुरक्षा एजेंसियां ​​इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या बुधवार को हुई आगज़नी की घटना का संबंध पहले हुई हत्याओं से है। वे घरों में आग लगाने से पहले सुनी गई गोलीबारी की खबरों की भी जांच कर रही हैं।
इस ताज़ा घटना के बाद इलाके में सुरक्षा हालात को लेकर समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच फिर से बहस छिड़ गई है।
कुकी गांव के अधिकारियों ने हिंसा की निंदा की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार समान सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि 2026 में कई ज़िलों में 28 से ज़्यादा कुकी नागरिकों की हत्या हुई है, जिनमें गर्भवती महिलाएं और धार्मिक नेता भी शामिल हैं। आरोप है कि ये हत्याएं NSCN-IM और ZUF-K जैसे हथियारबंद समूहों ने की हैं।
कुकी प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद किसी की गिरफ्तारी या मुकदमा नहीं चलाया गया। उन्होंने अधिकारियों पर 1990 के दशक से ही चुनिंदा तरीके से कानून लागू करने का आरोप लगाया।
कुकी नागरिक समाज संगठनों ने नागरिकों की हत्याओं की तुरंत नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से जांच कराने, प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने और संवेदनशील सीमावर्ती गांवों में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स की स्थायी तैनाती की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हिंसा और अपर्याप्त सुरक्षा व जवाबदेही से अधिकारियों पर जनता का भरोसा और कम हो सकता है।
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