मणिपुर

NRC को लेकर मणिपुर सरकार सख्त जनगणना से पहले उठाई मांग

nidhi
19 Aug 2026 3:37 PM IST
NRC को लेकर मणिपुर सरकार सख्त जनगणना से पहले उठाई मांग
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डेमोग्राफिक बदलाव का हवाला मणिपुर सरकार ने NRC पर बढ़ाया दबाव
इंफाल: मणिपुर सरकार ने राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के अपडेट की मांग एक बार फिर दोहराई है। सरकार का कहना है कि जनगणना से पहले NRC प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए, ताकि राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव, असंतुलन और अवैध प्रवास से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जा सके।
राज्य सरकार के प्रवक्ता और विधायक डॉ. सपम रंजन सिंह ने कहा कि NRC का मुद्दा लंबे समय से सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि मणिपुर विधानसभा ने वर्ष 2022 में NRC को लेकर प्रस्ताव पारित किया था, जिसे 2024 में दोबारा समर्थन दिया गया।
केंद्र सरकार से संपर्क करेगी टीम
मणिपुर सरकार ने बताया कि विधायकों का एक दल जल्द ही नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के नेताओं से मुलाकात करेगा और राज्य में NRC अपडेट की प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखेगा।
सरकार का कहना है कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल या समुदाय से जुड़ा नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य और लोगों की चिंताओं से संबंधित है।
जनगणना से पहले NRC की मांग
राज्य में कुछ सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों की ओर से भी मांग उठाई जा रही है कि पहले NRC अपडेट किया जाए और उसके बाद जनगणना प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे राज्य में नागरिकों की पहचान और जनसांख्यिकीय स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सरकार ने बताई अवैध प्रवास की चिंता
मणिपुर सरकार ने NRC की जरूरत बताते हुए अवैध प्रवास और बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप को लेकर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि NRC प्रक्रिया से वास्तविक नागरिकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, NRC प्रक्रिया को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी और कई प्रशासनिक पहलुओं पर विचार जरूरी होगा।
शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील
NRC की मांग को लेकर राज्य के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखें तथा किसी भी तरह की हिंसा से बचें।
NRC को लेकर जारी है बहस
मणिपुर में NRC का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रहा है। समर्थकों का कहना है कि इससे अवैध प्रवास की पहचान में मदद मिलेगी, जबकि आलोचक इसके सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
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