मणिपुर

Manipur : गांवों की संख्या बढ़ोतरी पर पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने उठाए सवाल

Kavita2
7 Jun 2026 5:18 PM IST
Manipur : गांवों की संख्या बढ़ोतरी पर पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने उठाए सवाल
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Manipur मणिपुर: पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य के पहाड़ी जिलों में “गांवों की असामान्य वृद्धि” को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ आंकड़े साझा करते हुए दावा किया है कि पिछले पांच दशकों में कई क्षेत्रों में गांवों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो प्रशासनिक और जनसंख्या संरचना से जुड़े मुद्दों की ओर संकेत करती है।

सिंह द्वारा साझा किए गए एक इन्फोग्राफिक में कांगपोकपी, चुराचांदपुर, सेनापति और उखरुल जिलों के 1972 और 2023 के गांवों के आंकड़ों की तुलना की गई है। इन आंकड़ों के अनुसार, चारों जिलों में गांवों की कुल संख्या 1972 में 754 थी, जो 2023 में बढ़कर 1,865 हो गई है। इस अवधि में कुल 1,111 नए गांव जुड़े हैं।

आंकड़ों के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि कांगपोकपी जिले में गांवों की संख्या 193 से बढ़कर 713 हो गई, जो एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। वहीं चुराचांदपुर जिले में गांवों की संख्या 339 से बढ़कर 874 तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस वृद्धि की प्रक्रिया और इसके पीछे के कारणों पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह की तेजी से बढ़ोतरी केवल जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक पुनर्गठन, नए बस्तियों का निर्माण या अन्य सामाजिक-राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इस विषय पर विस्तृत जांच और समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में गांवों की परिभाषा और सीमाओं में बदलाव, नई बस्तियों का पंजीकरण और स्थानीय विकास प्रक्रियाएं भी इस तरह के आंकड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही, पिछले कुछ दशकों में जनजातीय क्षेत्रों में बसावट के स्वरूप में भी बदलाव देखा गया है।

एन. बीरेन सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चा में है। उन्होंने संकेत दिया है कि इस प्रकार के आंकड़ों को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है ताकि राज्य में विकास और प्रशासनिक नीतियों को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।

फिलहाल राज्य प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।

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