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नई दिल्ली: मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा के मद्देनजर, कांग्रेस ने रविवार को मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के तत्काल इस्तीफे, विधानसभा भंग करने और राज्य में तुरंत चुनाव कराने की मांग की, ताकि वहां शांति और व्यवस्था बहाल हो सके।
मणिपुर के लिए कांग्रेस प्रभारी और सांसद सप्तगिरी उलाका ने सभी समुदायों के नागरिकों को तुरंत सुरक्षा देने, और हत्या, गोलीबारी, आगजनी तथा नागरिकों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के हर मामले में एक तय समय-सीमा के भीतर जांच और कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की।
महिला कांग्रेस प्रमुख अलका लांबा के साथ यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उलाका ने कहा, "23 अक्टूबर 2026 को पांच जिलों में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। वे ढोल और बर्तन बजाते हुए सड़कों पर उतर आए। उन्होंने लोक भवन की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और उन पर लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े।"
उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर को जंगल से जलाऊ लकड़ी इकट्ठा कर रहे तीन मैतेई नागरिकों की हत्या कर दी गई और कई अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि लोग उनके शवों को मुख्यमंत्री आवास ले गए और न्याय की मांग की।
उन्होंने बताया कि कामजोंग में भी इसी तरह की हिंसा हुई, जहां कुकी और नागा समुदाय के नागरिकों की हत्या कर दी गई।
उलाका ने कहा, "पूरा राज्य जल रहा है, और इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें जिम्मेदार हैं।"
उन्होंने बताया कि मई 2023 से अब तक लगभग 300 लोगों की जान जा चुकी है, 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं, और 24,000 लोग अभी भी विस्थापित हैं।
उन्होंने याद दिलाते हुए कहा, "जब मई 2023 में शुरुआती संघर्ष शुरू हुआ, तो हमने सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा था। बाद में, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मणिपुर का दौरा किया। हमने अपनी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' की शुरुआत भी मणिपुर से ही की थी।"
उलाका ने कहा, "(राज्यपाल) अजय कुमार भल्ला जी ने कहा था कि वे सब कुछ ठीक कर देंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। फिर एक नए मुख्यमंत्री आए, लेकिन वे भी किसी चीज को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं।"
कांग्रेस की मांगों को रखते हुए, उलाका ने सभी समुदायों के नागरिकों को तुरंत सुरक्षा देने की अपील की, खासकर उन इलाकों में जो संवेदनशील हैं और जहां संघर्ष चल रहा है। उन्होंने हत्या, गोलीबारी, आगजनी और आम नागरिकों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के हर मामले में एक तय समय-सीमा के भीतर जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उलाका ने 'ऑपरेशन रोकने के नियमों' (सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस ग्राउंड रूल्स) को सख्ती से लागू करने और उनकी समीक्षा करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि जहाँ भी इन नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने पूरे मणिपुर में लोगों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही को फिर से बहाल करने की भी मांग की।
उलाका ने कहा कि शांति बहाली, पुनर्वास और अपने घरों से विस्थापित हुए सभी लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए एक विश्वसनीय और समयबद्ध रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, मानवीय सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए और जवाबदेही तय करने के उपाय किए जाने चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री के तत्काल इस्तीफे, विधानसभा को भंग करने और तुरंत विधानसभा चुनाव कराने की भी मांग की, ताकि वहां शांति और व्यवस्था बहाल हो सके।
उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी अपील की कि वह हिंसा को खत्म करने, जवाबदेही तय करने और सभी को शामिल करते हुए शांति प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक ठोस योजना बनाए।
लंबा ने अपनी बात रखते हुए बताया कि उन्होंने 1 से 4 अक्टूबर तक मणिपुर का दौरा किया, जहाँ "हम उन महिलाओं से मिले जो पिछले 3 सालों से हिंसा के कारण पीड़ित हैं।"
उन्होंने कहा, "मणिपुर में बीजेपी सरकार वहां हो रही हिंसा को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। न तो हिंसा रुक रही है और न ही हिंसा करने वालों को कोई सजा मिल रही है।"
लंबा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह 1 नवंबर को होने वाली रैली के लिए पुलिस मुख्यालय में बैठक तो कर सकते हैं, लेकिन वे मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए इंफाल नहीं जा सकते।
पिछले हफ्ते कांग्रेस ने मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती राज्य में लगातार हो रही खून-खराबे की घटनाएं, बीजेपी की विफलता का बड़ा सबूत हैं। यह दिखाता है कि बीजेपी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रही है।
मई 2023 में मणिपुर की घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच जातीय संघर्ष शुरू हुआ था। इस हिंसा में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, 49 लोग लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। हाल के महीनों में कुकी और नागा समुदायों के बीच भी झड़पों की खबरें सामने आई हैं।
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