
Manipur मणिपुर: केंद्र सरकार ने मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा की जांच कर रहे जांच आयोग का कार्यकाल छह महीने और बढ़ा दिया है। इसके साथ ही आयोग की रिपोर्ट जमा करने की नई समय सीमा अब 20 नवंबर, 2026 तय की गई है।
गुरुवार को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी रिपोर्ट “जितनी जल्दी हो सके, लेकिन 20 नवंबर, 2026 के बाद नहीं” प्रस्तुत करे। इससे पहले आयोग की रिपोर्ट के लिए तय समय सीमा कम थी, जिसे अब विस्तारित कर दिया गया है।
यह जांच आयोग 4 जून, 2023 को गठित किया गया था, जो उस वर्ष 3 मई को मणिपुर के पहाड़ी जिलों में हुए “ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च” के बाद भड़की व्यापक हिंसा की जांच कर रहा है। यह मार्च मेइतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर तनाव फैल गया था।
हिंसा के दौरान राज्य में व्यापक स्तर पर झड़पें हुईं, जिनमें 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हो गए। आगजनी की घटनाओं में घरों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा।
इस जातीय संघर्ष ने मणिपुर में मेइतेई और कुकी समुदायों के बीच गहरी दरार को उजागर किया। शुरुआती हिंसा के बाद भी राज्य के कई हिस्सों में छिटपुट घटनाएं और तनाव बना रहा, जिससे सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास लगातार चुनौतीपूर्ण बने रहे।
आयोग का कार्य अब इन घटनाओं की विस्तृत जांच कर उनके कारणों, परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को लेकर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है, जिसे केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।
फिलहाल, जांच प्रक्रिया जारी है और विस्तारित समय सीमा के साथ आयोग से विस्तृत और समग्र रिपोर्ट की उम्मीद की जा रही है।





