
Manipur मणिपुर: मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने बुधवार को राज्य में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरस्त्रीकरण (हथियार वापस लेने) को अत्यंत आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी हिस्सों में अवैध या निजी रूप से रखे गए हथियारों को वापस लेना समय की मांग है।
मुख्यमंत्री ने यह बात उखरुल जिले के सिनाकेइथेई गांव से आए तांगखुल नागा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान कही। इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में मौजूदा तनावपूर्ण हालात को देखते हुए गांव में राज्य पुलिस बल की तैनाती की मांग रखी।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी से स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है।
मुख्यमंत्री सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की शांति प्रक्रिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम हथियारों का त्याग है।
उन्होंने कहा कि निरस्त्रीकरण के बिना स्थायी शांति स्थापित करना संभव नहीं है, इसलिए सभी समुदायों से सहयोग की अपेक्षा की जाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बैठक में उखरुल के विधायक राम मुइवाह भी मौजूद थे, जो सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी पार्टी नागा पीपल्स फ्रंट (NPF) से जुड़े हैं। उनकी उपस्थिति को क्षेत्रीय स्तर पर संवाद और समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
राज्य में हाल के समय में विभिन्न इलाकों में तनाव की स्थिति को देखते हुए सरकार लगातार शांति बहाली और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य की मौजूदा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मणिपुर सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य में स्थायी शांति के लिए निरस्त्रीकरण और सुरक्षा बलों की तैनाती दोनों ही अहम कदम होंगे।





