मणिपुर

मणिपुर में हिंसा से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू

SHIDDHANT
16 March 2026 11:41 PM IST
मणिपुर में हिंसा से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू
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Imphal इम्फाल। मणिपुर सरकार ने राज्य में जातीय हिंसा से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के पुनर्वास की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दी है। राज्य के गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास सिंह ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कांग्रेस विधायक थोकचोम लोकेश्वर सिंह के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को धीरे-धीरे उनके घरों में बसाने के लिए कदम उठा रही है।
इससे पहले मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने राज्य के बजट में हालिया जातीय हिंसा से प्रभावित महिलाओं की सहायता के लिए 350 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस वित्तीय सहायता से राज्यभर में करीब 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पिछले महीने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकात कर राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी। इनमें विस्थापित लोगों के पुनर्वास का मुद्दा भी शामिल था।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में गृह मंत्री ने बताया कि अब तक यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के 1,435 कैडरों का सत्यापन किया जा चुका है। प्रत्येक कैडर को फिलहाल 6,000 रुपये मासिक भत्ता दिया जा रहा है।
यूएनएलएफ के पाम्बेई गुट ने 29 नवंबर 2023 को भारत सरकार और मणिपुर सरकार के साथ त्रिपक्षीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता लागू है और इसके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने दिसंबर 2023 से अप्रैल 2024 की अवधि के लिए पांच किस्तों में 5.83 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।
इस बीच, कांग्रेस विधायक दल के नेता केइशम मेघचंद्र सिंह द्वारा हालिया ओलावृष्टि पर उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दे दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित स्थानों की जियोटैग्ड तस्वीरें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। राहत कार्यों में पहले क्षतिग्रस्त घरों को प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा।
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