मणिपुर
इम्फाल में COCOMI की बड़ी रैली, विस्थापितों की घर वापसी को लेकर प्रदर्शन
Ratna Netam
31 Oct 2026 5:59 PM IST

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इम्फाल। मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव और विस्थापन के बीच राजधानी इम्फाल में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। समन्वय समिति ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) की ओर से आयोजित रैली में प्रदर्शनकारियों ने सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को समाप्त करने और हिंसा के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।रैली में शामिल लोगों ने कहा कि राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विस्थापित परिवारों का पुनर्वास और प्रभावित समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना भी जरूरी है।मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा था। कई परिवारों को राहत शिविरों या अस्थायी ठिकानों में रहना पड़ा। ऐसे में विस्थापित लोगों की घर वापसी राज्य के सबसे महत्वपूर्ण मानवीय और प्रशासनिक मुद्दों में शामिल है।
हजारों लोगों ने निकाला मार्च, जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस रैली की शुरुआत इम्फाल पश्चिम जिले के क्वाकैथेल स्थित टिड्डिम ग्राउंड से हुई। प्रदर्शनकारियों ने टिड्डिम रोड, वाहेंगबाम लेइकाई और अन्य प्रमुख मार्गों से होकर थाउ ग्राउंड की ओर मार्च किया।प्रदर्शन में मैतेई और नगा समुदायों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर मणिपुर में शांति, न्याय और SoO समझौते को समाप्त करने की मांग लिखी थी।रैली के दौरान पुलिस ने केइसाम्पत जंक्शन के पास बैरिकेड लगाए। यह इलाका मुख्यमंत्री कार्यालय और लोक भवन के नजदीक है। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
COCOMI ने सरकार से मांगा जवाब
COCOMI के संयोजक वाई. धीरन ने रैली को राज्य के लोगों की सामूहिक आवाज बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थानीय समुदायों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है।धीरन ने राज्य सरकार के इस्तीफे की भी मांग की। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी हिंसा के बावजूद लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो पाया है।संगठन के पूर्व संयोजक खुराइजाम अथौबा ने भी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि SoO समझौते के अंतर्गत आने वाले कुछ सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से समझौते की समीक्षा कर उसे समाप्त करने की मांग दोहराई। हालांकि, सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
क्या है SoO समझौता?
सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी SoO एक संघर्षविराम व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सशस्त्र समूहों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक गतिविधियां रोककर राजनीतिक बातचीत का रास्ता तैयार करना था।अगस्त 2008 में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जो समुदाय से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच औपचारिक समझौता हुआ था। इसमें कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट के अंतर्गत आने वाले संगठन शामिल थे।समझौते के नियमों के अनुसार, संबंधित सशस्त्र समूहों के सदस्यों को निर्धारित शिविरों में रहना होता है और हिंसक गतिविधियों से दूर रहना होता है। हथियारों को भी निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत रखा जाना चाहिए।हाल की रिपोर्टों के अनुसार, समझौते की अवधि 4 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई थी और उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी संगठनों ने व्यवस्था को औपचारिक रूप से समाप्त करने की मांग की है।
विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी पर जोर
रैली की प्रमुख मांगों में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षित घर वापसी शामिल रही। मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद अनेक परिवारों को अपने घर और गांव छोड़ने पड़े थे।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांति बहाली का वास्तविक अर्थ तभी होगा, जब विस्थापित परिवार बिना किसी भय के अपने मूल निवास स्थानों पर लौट सकेंगे।इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और समुदायों के बीच विश्वास कायम करने जैसे कदम आवश्यक होंगे।संगठनों ने मांग की कि सरकार पुनर्वास के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करे। यह मांग पहाड़ी और घाटी, दोनों क्षेत्रों के विस्थापित परिवारों के लिए उठाई गई।
नगा संगठनों ने भी दिया समर्थन
COCOMI की रैली को यूनाइटेड नगा काउंसिल सहित कई नगा संगठनों का समर्थन मिला। सेनापति और चंदेल जिलों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए।इम्फाल की रैली में जॉइंट ट्राइब काउंसिल मणिपुर, नगा ह्यूमैनिटेरियन एड कमेटी और अन्य नागरिक संगठनों की भागीदारी रही।आयोजकों ने इसे पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के समुदायों के बीच एकजुटता का प्रदर्शन बताया। कार्यक्रम की थीम 'चिंगमी-तम्मी' रखी गई, जिसका संबंध पहाड़ और घाटी के लोगों से है।
असम राइफल्स की वापसी और NRC की भी मांग
रैली में शामिल संगठनों ने मणिपुर से असम राइफल्स को हटाने और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC को 1951 के आधार वर्ष के साथ लागू करने की भी मांग की।आयोजकों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और कथित अवैध आव्रजन को लेकर चिंता जताई। इन मांगों पर अलग-अलग समुदायों और संबंधित पक्षों के दृष्टिकोण भिन्न हो सकते हैं।मणिपुर की भौगोलिक स्थिति और म्यांमार से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए सुरक्षा संबंधी निर्णय केंद्र और राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत विषय हैं।
तीन साल से अधिक समय से हिंसा का असर
मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। पीटीआई की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं।इसी सप्ताह 14 मैतेई लोगों पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत के बाद राज्य में विरोध और तेज हुआ है।इम्फाल में हुई इस बड़ी रैली ने स्पष्ट किया है कि शांति, सुरक्षा और पुनर्वास की मांग अभी भी मणिपुर के सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में है। अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।
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