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IDP की सुरक्षित वापसी के लिए CSO
इंफाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों यानी IDP (Internally Displaced Persons) की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी 2026 को नई सरकार के गठन के बाद से राहत शिविरों में रह रहे परिवारों के पुनर्वास और सामान्य जीवन बहाल करने को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने यह बात इंफाल के सिटी कन्वेंशन सेंटर, पैलेस कंपाउंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें पात्र लेबर कार्ड धारकों और खास तौर पर राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दी गई।
कार्यक्रम के दौरान कुल 2 करोड़ 19 लाख 25 हजार रुपये की सहायता राशि वितरित की गई। इसमें राहत शिविरों में रह रहे बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष वित्तीय सहायता और Manipur Building and Other Construction Workers’ Welfare Board की अन्य योजनाओं के लाभ शामिल थे।
खेमचंद सिंह ने कहा कि सरकार ने मौजूदा संकट के कारण पैदा हुए भरोसे की कमी को दूर करने के लिए विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों (CSO) के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की है। सरकार का मकसद केवल लोगों को राहत शिविरों से निकालना नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना है जिसमें वे सुरक्षा और भरोसे के साथ अपने गांव और घरों में लौट सकें।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि लंबे समय तक राहत शिविरों में रहना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने ही घरों में वापस न लौट पाना विस्थापित लोगों के लिए भावनात्मक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बेहद कठिन स्थिति है। इसी कारण सरकार पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अलग-अलग समुदायों और संगठनों से संवाद कर रही है।
राज्य सरकार फिलहाल टोरबुंग ग्राम पंचायत क्षेत्र में 30 परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी काम कर रही है। सरकार का दावा है कि जहां सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियां अनुकूल होंगी, वहां चरणबद्ध तरीके से IDP परिवारों की वापसी कराई जाएगी।
मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों और अस्थायी ठिकानों में रहना पड़ा था। इसके बाद राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करना और विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है। खेमचंद ने कहा कि सरकार इसी दिशा में भरोसा बहाली, संवाद और पुनर्वास को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें लंबे समय के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। शिक्षा सहायता, श्रमिक कल्याण योजनाओं और अन्य वित्तीय योजनाओं के जरिए राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को सहयोग दिया जा रहा है।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विस्थापित लोगों की वापसी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न रह जाए, बल्कि उनके लिए सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक भरोसे का भी स्थायी इंतजाम हो। आने वाले महीनों में सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम और अलग-अलग समुदायों के बीच बातचीत की प्रगति पर नजर रहेगी।
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