मणिपुर

दूरदराज के इलाकों तक फिर उड़ान, मणिपुर में बहाल होंगी हेलीकॉप्टर सेवाएं

nidhi
23 Oct 2026 3:08 PM IST
दूरदराज के इलाकों तक फिर उड़ान, मणिपुर में बहाल होंगी हेलीकॉप्टर सेवाएं
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इंफाल: मणिपुर कैबिनेट ने दूर-दराज के इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवाओं को फिर से शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, 'लोकटक दिवस' को हर साल राज्य स्तरीय उत्सव के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है। साथ ही, पात्र समाचार पत्र प्रिंटिंग प्रेसों को धान के खेतों से सटी कुछ सीमित जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगने की छूट भी दी गई है।
ये फैसले 22 अक्टूबर को मंत्रीपुखरी स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए।
कैबिनेट ने मणिपुर में हेलीकॉप्टर सेवाओं को बहाल करने के लिए भारत सरकार के उपक्रम 'पवन हंस लिमिटेड' को काम पर रखने की मंजूरी दी है। ये सेवाएं 1 अक्टूबर, 2026 से बंद थीं।
इस व्यवस्था के तहत, एक ट्विन-इंजन (दो इंजन वाला) हेलीकॉप्टर छह महीने तक या टेंडर प्रक्रिया के जरिए किसी नियमित ऑपरेटर के चुने जाने तक काम करेगा। इस सेवा के लिए हर महीने कम से कम 40 घंटे की उड़ान का लक्ष्य रखा गया है।
इस सेवा का मकसद दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों को इंफाल से फिर से जोड़ना है, ताकि यात्रियों को आने-जाने में आसानी हो और आपातकालीन स्थिति में उन्हें चिकित्सा सहायता मिल सके।
इसका खर्च केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'नॉर्थ ईस्ट हेलीकॉप्टर योजना' के तहत साझा किया जाएगा। अगर केंद्र से कोई मदद नहीं मिलती है, तो राज्य सरकार इस सेवा को जारी रखने के लिए पूरा खर्च उठाएगी।
कैबिनेट ने 'लोकटक दिवस' को हर साल राज्य स्तरीय उत्सव के रूप में मनाने को भी मंजूरी दी है। यह उत्सव 'मेरा' (Mera) महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा, जिसे 'थानिल ऑफ मेरा' (Thanil of Mera) भी कहा जाता है।
यह सामुदायिक परंपरा 1990 में थांगा से शुरू हुई थी। इसमें लोकटक झील का जश्न मनाया जाता है, जो पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह मणिपुर के समुदायों के लिए आजीविका का एक अहम स्रोत और उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
इस साल का उत्सव 26 अक्टूबर से शुरू होगा, जो थांगा के लोकटक लैरेम्बी ग्राउंड और कोमलाखोंग में आयोजित किया जाएगा। लोकटक विकास प्राधिकरण, स्थानीय क्लबों के साथ मिलकर, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक खेल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करेगा। इसमें आम जनता, छात्रों और युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है। एक अन्य फैसले में, मंत्रिमंडल ने 'मणिपुर धान भूमि और आर्द्रभूमि संरक्षण अधिनियम, 2014' के तहत 'सार्वजनिक उद्देश्यों' की सूची में उन पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त समाचार पत्र प्रिंटिंग प्रेसों को शामिल करने को मंजूरी दी, जो वेब ऑफसेट मशीनों से लैस हैं।
पात्र प्रिंटिंग प्रेस अब अधिनियम के अन्य सुरक्षा उपायों और आवश्यक मंजूरियों के अधीन, 0.62 एकड़ तक की लगातार धान भूमि (contiguous paddy land) के उपयोग के लिए अनुमति मांग सकते हैं।
इस कदम का उद्देश्य समाचार पत्रों की बड़ी प्रिंटिंग इकाइयों को भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों से दूसरी जगह स्थानांतरित करने में मदद करना है, ताकि शोर-शराबे की समस्या, खासकर रात के समय, कम हो सके।
सरकार ने कहा कि धान के खेतों और आर्द्रभूमियों (wetlands) के दुरुपयोग को रोकने के लिए पात्रता शर्तें लागू रहेंगी।
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