मणिपुर

नोनी और कांगपोकपी में हथियारबंद हमलों और आगज़नी में पाँच गाँवों को निशाना बनाया

Tara Tandi
23 Sept 2026 3:04 PM IST
नोनी और कांगपोकपी में हथियारबंद हमलों और आगज़नी में पाँच गाँवों को निशाना बनाया
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इंफाल: बुधवार तड़के मणिपुर के नोनी और कांगपोकपी ज़िलों में नागा समुदाय के पांच गांवों को हथियारबंद हमलों का निशाना बनाया गया। इन हमलों में ज़बरदस्त गोलीबारी और आगज़नी हुई, जिसमें कई घर और अन्य संपत्तियां नष्ट हो गईं। सैकड़ों निवासियों को भागकर पास के जंगलों में शरण लेनी पड़ी। माकुई चमरियुपियु गांव की अथॉरिटी के बयान के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजे भारी गोलीबारी शुरू हुई।
गांव की संस्था ने आरोप लगाया कि कुकी नेशनल फ्रंट-प्रोग्रेसिव (KNF-P), कुकी नेशनल फ्रंट-नेहलुन (KNF-N) और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA) के हथियारबंद कैडरों ने ये हमले किए। आरोप है कि हमलावरों ने पुश्तैनी घरों और अन्य संपत्तियों में आग लगा दी।
प्रभावित बस्तियों में कांगपोकपी ज़िले के माकुई चमरियुपियु, लंगका और थानाम्बा, तथा नोनी ज़िले के ताज़ेइकाइफुन पार्ट 3 और कपनिंगचिंग मुक्ति पार्ट 5 शामिल हैं।
गांव की अथॉरिटी ने राज्य के अधिकारियों पर सुरक्षा हालात के बारे में पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद इलाके की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने 'सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन्स' (SoO) समझौते पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस समझौते से उन समूहों को सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए जो इसके नियमों का उल्लंघन करते हैं।
गांव की संस्था ने मांग की कि इन तीनों समूहों के साथ SoO समझौता रद्द किया जाए। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की स्थायी तैनाती, विस्थापित परिवारों के लिए मुआवज़े और हमलों की समय-सीमा के भीतर जांच की भी मांग की। उन्होंने दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
गांव की अथॉरिटी ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री से भी दखल देने की अपील की।
नोनी ज़िले में, पुलिस अधिकारियों ने नंगबा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा अलग-अलग हमलों की पुष्टि की। कपनिंगचिंग मुक्ति पार्ट 5 में तीन से चार घर जला दिए गए।
नेशनल हाईवे-37 के पास ताज़ेइकाइफुन पार्ट 3 में, सुबह करीब 6:30 बजे गांव के एक बंकर पर गोलीबारी हुई। इस हमले के बाद स्थानीय ग्राम रक्षकों (जिन्होंने लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल किया) और हथियारबंद हमलावरों के बीच दो घंटे तक गोलीबारी चली।
बाद में असम राइफल्स और राज्य पुलिस के जवानों ने इलाके को सुरक्षित किया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना में कोई ग्रामीण मारा या घायल नहीं हुआ। संपत्ति के नुकसान का अंतिम आकलन अभी बाकी है। गोलीबारी के बाद, तज़ेइकाइफुन के निवासियों ने आरोप लगाया कि घटनास्थल से मिले कुछ इस्तेमाल किए गए कारतूसों पर ऐसे निशान (हेडस्टैम्प मार्किंग) थे जो भारत सरकार की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों से जुड़े थे।
ग्रामीणों का दावा था कि इन निशानों में “KF” (जो खडकी की एम्युनिशन फैक्ट्री से जुड़ा है) और “OFV” (जो वरनगांव की ऑर्डनेंस फैक्ट्री से जुड़ा है) शामिल थे।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकारी फैक्ट्रियों में बने कारतूस गैर-सरकारी गुटों तक कैसे पहुँचे। अधिकारियों ने कहा कि जाँच के तहत मिली चीज़ों की फोरेंसिक जाँच की जाएगी।
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