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इंफाल: पशु चिकित्सा और पशुपालन निदेशालय ने मणिपुरी टट्टू (पोनी) के मालिकों के लिए सालाना प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति जानवर करने का प्रस्ताव रखा है। विभाग ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से अब तक 33 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVUs) ने 7,205 मामलों को संभाला है।
निदेशालय के ऑडिटोरियम में सूचना और जनसंपर्क निदेशालय द्वारा आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, निदेशक एल. अरुणकुमार सिंह ने इन विकास कार्यों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारी मणिपुर में टट्टुओं की सटीक संख्या का पता लगाने के लिए हाल ही में शुरू की गई 'पोनी रजिस्ट्रेशन सिस्टम' (PRS) को लागू कर रहे हैं। विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले एक साल में इनकी संख्या में वृद्धि हुई है।
इस संरक्षण पहल के लिए सालाना 30 लाख रुपये मिलते हैं। सिंह ने कहा कि प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव PRS शुरू होने के बाद आया है। पिछले साल, राज्यपाल ने 1,150 टट्टू मालिकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की थी।
यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय ब्रांडिंग ढांचे से भी जुड़ी है, जिसके तहत मणिपुर ने 'पोलो हेरिटेज' (पोलो विरासत) को अपनी एक खास पहचान (Unique Selling Proposition) के रूप में चुना है।
सिंह ने बताया कि संकटग्रस्त और स्थानीय मणिपुरी टट्टुओं के संरक्षण के लिए DoNER मंत्रालय और मुख्यमंत्री की ओर से भेजे गए एक संयुक्त प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी मिल गई है। यह पहल आनुवंशिक कारकों के आधार पर चुनिंदा प्रजनन (selective breeding) और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित होगी।
पशु चिकित्सा सेवाओं के बारे में सिंह ने बताया कि राज्य की MVUs टोल-फ्री नंबर 1962 के जरिए रोजाना मदद मुहैया कराती हैं। 1 अप्रैल 2026 से अब तक इन यूनिट्स ने 7,205 मामलों को दर्ज किया है।
फील्ड टीमों ने टेलीफोन पर सलाह देकर 693 मामलों का समाधान किया, जबकि 6,512 मामलों में मौके पर जाकर सेवाएं दीं।
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