मणिपुर

मणिपुर संघर्ष के बाद बढ़ीं आर्थिक मांगें, स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जताया विरोध

nidhi
30 Oct 2026 11:22 AM IST
मणिपुर संघर्ष के बाद बढ़ीं आर्थिक मांगें, स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जताया विरोध
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मणिपुर: इम्फाल ईस्ट जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के अंतर्गत काम करने वाले दर्जनों स्वास्थ्य कर्मियों ने गुरुवार को पोरोमपत के SAYC मैदान में धरना दिया। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों और सशस्त्र समूहों द्वारा लगातार की जा रही पैसों की मांग से तुरंत सुरक्षा की अपील की।
इस प्रदर्शन में डॉक्टर, नर्स, लैब तकनीशियन, सहायक नर्स दाई (ANM) और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण, सार्वजनिक सेवा करते हुए अपने परिवारों का भरण-पोषण करना लगभग असंभव हो गया है।
चिकित्सा कर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 3 मई 2023 को हिंसा भड़कने के बाद से जबरन वसूली की मांगें काफी बढ़ गई हैं। अशांति से पहले यह सालाना 4-5 लाख रुपये थी, जो पिछले एक साल में बढ़कर लगभग 16-17 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
'वारी सिंगबुल नेटवर्क' की रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट फ्रंटलाइन चिकित्सा कर्मियों पर पड़ रहे भारी दबाव को दर्शाता है। जिले के 'गैर-संचारी रोग सेल' (Non-Communicable Disease Cell) के फार्मासिस्ट और स्टोर-इन-चार्ज, खगेमबम बिक्रमजीत सिंह ने 'वारी सिंगबुल' को बताया कि चिकित्सा टीमों को अक्सर बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेल आयोजनों और मेलों में तैनात किया जाता है। इसके ऊपर से, उन्हें अपनी मूल कमाई में से जबरन वसूली की आक्रामक मांगों का सामना करना पड़ता है।
नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि पैसों की मांगें मुख्य CMO कार्यालय और अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों, दोनों को निशाना बनाती हैं। नतीजतन, कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अक्सर दो बार भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ता है—एक बार जिला स्तर पर और दूसरी बार अपने स्वास्थ्य केंद्र के स्तर पर।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि CMO कार्यालय ने कर्मचारियों के प्रदर्शन करने के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कर्मचारियों की चिंताओं को जायज माना और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा किया। अधिकारियों ने विशेष रूप से दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाली महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, जहां उनके डराए-धमकाए जाने का खतरा अधिक होता है।
हाथों में तख्तियां लिए इन फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों ने स्थानीय निकायों और सशस्त्र समूहों से 'आवश्यक सेवाओं' को न छेड़ने की अपील की। ​​साथ ही, उन्होंने राज्य प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की, ताकि चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी जबरन वसूली या दबाव के सुचारू रूप से चलती रहें।
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