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मणिपुर: मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 12 अक्टूबर को कांगपोकपी ज़िले के माकुई गाँव में नागा विलेज गार्ड्स की हत्या को "बर्बर" बताया और राज्य में हिंसा के दौर को खत्म करने के लिए समुदायों के बीच बातचीत का आह्वान किया।
बीरेन सिंह ने ये बातें इंफाल में जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) की मोर्चरी में मीडिया से बात करते हुए कहीं, जहाँ रविवार देर रात मारे गए दो विलेज गार्ड्स के शव लाए गए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री पीड़ित परिवारों से मिलने और अपनी संवेदना व समर्थन देने के लिए अस्पताल पहुँचे।
मृतकों की पहचान माकुई गाँव के 48 वर्षीय डिबाम्बू रिंगकांगमाई और 52 वर्षीय अज़िनबू रिंगकांगमाई के तौर पर हुई। वे उन नागा विलेज गार्ड्स में शामिल थे, जिनकी 10 अक्टूबर को माकुई अशांग नागा गाँव में संदिग्ध हथियारबंद कुकी उग्रवादियों के हमले में मौत हो गई थी।
हत्याओं की निंदा करते हुए बीरेन सिंह ने कहा कि किसी को भी नागरिकों के खिलाफ हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए, चाहे उनकी माँगें या शिकायतें कुछ भी हों।
उन्होंने कहा, "इस तरह की हत्याएँ बर्बर और बेहद निंदनीय हैं। किसी को भी नागरिकों के खिलाफ हिंसा या बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगर किसी की कोई माँग है, तो उन्हें बातचीत और चर्चा के लिए आगे आना चाहिए।"
'मज़बूत सुरक्षा और खुफिया जानकारी से हमले रोके जा सकते थे'
राज्य के अंदरूनी पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीरेन सिंह ने कहा कि पर्याप्त सुरक्षा तैनाती और मज़बूत खुफिया जानकारी जुटाकर हत्या, अपहरण और आगजनी की घटनाओं को रोका जा सकता था।
उन्होंने जारी हिंसा पर चिंता व्यक्त की और नागरिकों तथा संवेदनशील बस्तियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एहतियाती उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
शांति की अपील, NRC का मुद्दा उठाया
बीरेन सिंह ने समुदायों से शांतिपूर्वक साथ रहने की अपनी अपील दोहराई और अवैध आप्रवासन (illegal immigration) से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के संभावित उपाय के तौर पर प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न (NRC) का ज़िक्र किया।
उन्होंने कहा, "सरकार पहले ही NRC का प्रस्ताव दे चुकी है और केंद्र ने इस अनुरोध पर ध्यान दिया है। इसे निश्चित रूप से जल्द ही लागू किया जाएगा। जब NRC अवैध आप्रवासियों के मुद्दे का समाधान करेगा, तो हम आपस में क्यों लड़ें? एक-दूसरे से लड़ने के बजाय, आइए हम साथ रहने की कोशिश करें।" उन्होंने सभी समुदायों से हिंसा छोड़ने और बातचीत के ज़रिए अपनी शिकायतें सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांति तभी बहाल हो सकती है जब लगातार बातचीत होती रहे।
मकुई गांव पर हमले के बाद उठीं मांगें
यह बयान 10 अक्टूबर की सुबह कांगपोकपी ज़िले में इंफाल-तामेई रोड पर स्थित मकुई अशांग नागा गांव पर हुए हमले के बाद आया है। खबरों के मुताबिक, हथियारों से लैस संदिग्ध उग्रवादियों ने आधुनिक हथियारों से गांव पर हमला किया। हमले में तीन नागा विलेज गार्ड्स (गांव के सुरक्षाकर्मी) के मारे जाने की खबर है।
मारे गए लोगों की पहचान मकुई गांव के 52 वर्षीय अज़िनबोउ रिंगकांगमाई और 48 वर्षीय डिबाम्बोउ रिंगकांगमाई, तथा थालोन गांव के 23 वर्षीय माचुंगामंग डाइमाई के तौर पर हुई है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें हमले के बाद अज़िनबोउ का शव और कथित तौर पर कटा हुआ उनका सिर दिखाई दे रहा था। इस फुटेज और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस हमले के साथ ही टपोन लियांगमाई गांव में भी घात लगाकर हमला करने की खबरें सामने आईं।
इस बीच, इनपुई, लियांगमाई, रोंगमेई और ज़ेमे समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल (JTC-मणिपुर) की वर्किंग कमेटी ने घोषणा की कि जब तक अज़िनबोउ का गायब सिर नहीं मिल जाता और सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए उनके परिवार को नहीं सौंपा जाता, तब तक मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा।
कमेटी ने भारत और मणिपुर सरकारों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने गायब हुए शरीर के हिस्से को बरामद करने और थांगबोई किपजेन, डेविड हैंगसिंग और डॉ. सैलेन हाओकिप की गिरफ्तारी की मांग की। कमेटी ने अपने बयान में इन तीनों को हमले का मुख्य आरोपी बताया है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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