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Manipur मणिपुर: असम राइफल्स ने मणिपुर के घाटी और पहाड़ी जिलों में नागरिक-सैन्य संपर्क, युवा सशक्तिकरण और मानवीय सहायता के कई कार्यक्रम चलाए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इसके जरिए असम राइफल्स सीमा सुरक्षा, उग्रवाद विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समुदायों से जुड़ाव को भी मजबूत कर रही है। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को ये बहुआयामी पहल कामजोंग, बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम और तेंगनौपाल जिलों में आयोजित की गईं। इसका मकसद सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, युवाओं को मार्गदर्शन देना और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना था।
पहल की शुरुआत शुक्रवार को कामजोंग जिले में वांगली कंपनी ऑपरेटिंग बेस के पास स्थित के. अशांगखुल्लेन गांव से हुई। यहां असम राइफल्स ने एक सुरक्षा बैठक की। बैठक की अध्यक्षता एक वरिष्ठ अधिकारी ने की। इसमें ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और सिविल सोसायटी संगठनों के सदस्यों समेत 11 नागरिक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय, कानून और व्यवस्था, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की रोकथाम और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर चर्चा हुई।
वरिष्ठ अधिकारी ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम -आफस्पा के कानूनी दायरे और उद्देश्य भी स्पष्ट किए। उन्होंने कहा कि अभियान पेशेवर तरीके से, संयम के साथ और जनता की गरिमा का सम्मान करते हुए चलाए जाते हैं। नागरिक प्रतिनिधियों ने सुरक्षा प्रयासों की सराहना की और क्षेत्रीय शांति व समावेशी विकास के लिए समर्थन दोहराया। शनिवार को असम राइफल्स ने बिष्णुपुर जिले में सीओबी नंबोल में युवाओं के लिए सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें नंबोल मोंगजिंग लेकाई स्टूडेंट यूनियन क्लब और लाइब्रेरी से जुड़े 35 युवाओं ने हिस्सा लिया।
जवानों ने करियर काउंसलिंग, कौशल विकास, शिक्षा के महत्व और सामाजिक सौहार्द में युवाओं की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया। युवाओं को सामाजिक बुराइयों से सतर्क रहने, ऑनलाइन जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की जांच करने और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने की सलाह दी गई। क्लब के प्रतिनिधियों ने इस मार्गदर्शन की सराहना की। इसी दिन असम राइफल्स ने इंफाल पश्चिम जिले के मणिपुरखरी से भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित तेंगनौपाल जिले के मोरेह में मदर टेरेसा द्वारा 1950 में स्थापित 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' केंद्र तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में मदद की। मोरेह स्थित इस केंद्र में चार सिस्टर्स करीब 60 वंचित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आश्रय देती हैं।
स्थानीय परिवहन की दिक्कतों के बावजूद असम राइफल्स ने चावल, दाल, बिस्किट, दवाएं, सोयाबीन उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी चीजें वहां पहुंचाईं। इससे सीमा क्षेत्र के वंचित बच्चों के लिए मानवीय सहायता और शैक्षिक सहयोग जारी रखने में मदद मिलेगी। प्रवक्ता ने कहा कि कामजोंग में सुरक्षा संवाद, बिष्णुपुर में युवा सहभागिता और इंफाल पश्चिम से तेंगनौपाल तक राहत सामग्री पहुंचाकर असम राइफल्स मणिपुर में आपसी विश्वास बढ़ाने, समुदायों को सशक्त करने और दीर्घकालिक शांति को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
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