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पनवेल। महाराष्ट्र के पनवेल तालुका स्थित कसलखंड इलाके में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता और पंजीकरण के मरीजों का इलाज करने का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने एक क्लिनिक में जांच के दौरान 27 वर्षीय युवक को कथित रूप से डॉक्टर बनकर मरीजों का उपचार करते पाया। जांच टीम ने क्लिनिक में रखी 133 प्रकार की दवाएं जब्त करने के साथ परिसर को सील कर दिया।
आरोपी की पहचान नूरुल हुड्डा के रूप में हुई है। वह पनवेल के कोन गांव स्थित म्हाडा कॉलोनी में रहता है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, युवक कसलखंड स्थित ‘आईजी हेल्थकेयर क्लिनिक’ में मरीजों का उपचार कर रहा था। जांच के दौरान उससे मेडिकल डिग्री, किसी चिकित्सा संस्थान से प्राप्त प्रमाणपत्र और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई वैध कागज प्रस्तुत नहीं कर सका।
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में युवक ने स्वीकार किया कि उसके पास चिकित्सा की कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है और न ही उसका नाम किसी अधिकृत मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत है। उसने कथित तौर पर बताया कि वह करीब दो महीने से इस क्लिनिक में प्रैक्टिस कर रहा था। इस अवधि में उसके द्वारा कितने मरीजों का उपचार किया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित निरीक्षण और क्षेत्र में अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं संचालित किए जाने की सूचना के आधार पर कसलखंड पहुंची थी। क्लिनिक में प्रवेश करने पर अधिकारियों ने युवक को मरीजों की जांच करते और दवाएं उपलब्ध कराते पाया। अधिकारियों ने उससे पहचान और मेडिकल योग्यता के दस्तावेज दिखाने को कहा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर क्लिनिक की विस्तृत तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान क्लिनिक में बड़ी संख्या में टैबलेट, कैप्सूल और सिरप रखे मिले। अधिकारियों ने दवाओं का विवरण तैयार किया तो वहां कुल 133 तरह की औषधियां होने की जानकारी सामने आई। दवाओं के बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा खरीद के स्रोत की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि इनमें ऐसी दवाएं तो शामिल नहीं थीं, जिन्हें केवल पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर दिया जा सकता है।
जांच टीम ने सभी दवाओं को जब्त कर पंचनामा तैयार किया। इसके बाद क्लिनिक को सील कर दिया गया, ताकि वहां दोबारा मरीजों का उपचार या दवाओं का वितरण न किया जा सके। अधिकारियों ने क्लिनिक में मिले मरीजों से भी जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग अब यहां इलाज कराने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रहा है।
मामले की शिकायत पनवेल तालुका पुलिस को दी गई। पुलिस ने संबंधित मेडिकल अधिकारी के बयान और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट 1961 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। यह कानून बिना वैध योग्यता और पंजीकरण के चिकित्सा सेवा देने पर रोक लगाता है।
प्रारंभिक कार्रवाई के तहत आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस ने उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत नोटिस भी जारी किया है। नोटिस के अनुसार, आरोपी को बुलाए जाने पर पूछताछ और न्यायालय की कार्यवाही में उपस्थित होना होगा। मामले में एकत्र किए गए दस्तावेज और जब्त सामग्री आगे की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि क्लिनिक किसके नाम पर चल रहा था और उसका पंजीकरण किसी सरकारी विभाग में कराया गया था या नहीं। क्लिनिक की जगह किराये पर ली गई थी अथवा आरोपी की ओर से सीधे संचालित की जा रही थी, इसकी भी जांच की जा रही है। भवन मालिक और क्लिनिक से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग यह भी पता लगा रहे हैं कि आरोपी ने किसी पंजीकृत डॉक्टर का नाम, डिग्री या पंजीकरण संख्या इस्तेमाल तो नहीं की। क्लिनिक के बोर्ड, पर्चियों, दवा के पैकेट, रजिस्टर और मरीजों को दिए गए दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान या पंजीकरण का गलत इस्तेमाल सामने आता है तो अतिरिक्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।
जब्त दवाओं की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं की भूमिका की भी पड़ताल हो सकती है। बिना मेडिकल योग्यता वाले व्यक्ति को इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग दवाएं किस आधार पर बेची गईं, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। दवा खरीद से संबंधित बिल, भुगतान और वितरण का रिकॉर्ड मांगा जा सकता है। दवाएं किसी अधिकृत विक्रेता से खरीदी गई थीं या दूसरे माध्यम से लाई गईं, इसकी पुष्टि की जाएगी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बिना योग्यता के मरीजों का उपचार करने को गंभीर खतरा बताया है। किसी बीमारी की गलत पहचान, अनुचित दवा और गलत खुराक मरीज की स्थिति बिगाड़ सकती है। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जबकि कई मरीजों को अन्य बीमारियों या पहले से चल रही दवाओं के कारण विशेष सावधानी की जरूरत होती है। केवल प्रशिक्षित और पंजीकृत चिकित्सक ही इन पहलुओं को समझकर उचित उपचार दे सकता है।
स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि किसी क्लिनिक या डॉक्टर से उपचार लेने से पहले उसकी योग्यता और पंजीकरण की पुष्टि करें। चिकित्सक का पंजीकरण प्रमाणपत्र सामान्यतः क्लिनिक में प्रदर्शित होना चाहिए। किसी तरह का संदेह होने पर नागरिक स्थानीय स्वास्थ्य विभाग या नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से जानकारी ले सकते हैं।
अधिकारियों ने इस क्लिनिक में इलाज करा चुके लोगों से अपने चिकित्सकीय दस्तावेज सुरक्षित रखने और किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर पंजीकृत डॉक्टर से संपर्क करने को कहा है। मामले में आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और वे न्यायालय में सिद्ध होना बाकी हैं।





