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मुंबई में 10 साल के बच्चे का पीछा करने का आरोप, फोटो-वीडियो बनाने वाला युवक गिरफ्तार

Kavita2
19 Sept 2026 9:58 AM IST
मुंबई में 10 साल के बच्चे का पीछा करने का आरोप, फोटो-वीडियो बनाने वाला युवक गिरफ्तार
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मुंबई। मुंबई में 10 वर्षीय बच्चे का कथित रूप से पीछा करने और मोबाइल फोन से उसकी तस्वीरें तथा वीडियो बनाने के मामले में पुलिस ने 28 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अभिजीत अशोक सर्वे के रूप में बताई गई है। पुलिस ने बच्चे के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में आरोपी के मोबाइल फोन और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है।

मामला घाटकोपर ईस्ट इलाके का है। शिकायतकर्ता 33 वर्षीय व्यक्ति केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत बताए गए हैं और अपने परिवार के साथ इलाके की एक रिहायशी इमारत में रहते हैं। उनका 10 वर्षीय बेटा केंद्रीय विद्यालय, IIT पवई में चौथी कक्षा का छात्र है। बच्चा रोजाना एक निजी स्कूल वैन से स्कूल आता-जाता है।

एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार बच्चा स्कूल से लौटने के बाद अपनी रिहायशी इमारत में पहुंचा था। इसी दौरान उसने एक अनजान व्यक्ति को अपने पीछे आते देखा। बच्चे ने बाद में अपने माता-पिता को बताया कि वह व्यक्ति इमारत के अंदर तक उसका पीछा करते हुए आया और उसे रोकने की कोशिश की।

आरोप है कि युवक ने अपने मोबाइल फोन से बच्चे की तस्वीरें और वीडियो भी बनाए। अनजान व्यक्ति के इस व्यवहार से बच्चा डर गया। सुरक्षित घर पहुंचने के बाद उसने अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई। बच्चे की बात सुनने के बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित पुलिस थाने से संपर्क किया।

बच्चे के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने घटनाक्रम की जांच शुरू की। पुलिस ने इलाके में मौजूद सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य उपलब्ध जानकारियों की मदद से संदिग्ध की पहचान करने का प्रयास किया। इसके बाद 28 वर्षीय अभिजीत अशोक सर्वे की पहचान आरोपी के रूप में होने की बात सामने आई और उसे हिरासत में लिया गया।

पुलिस ने पूछताछ और शुरुआती जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून POCSO Act और लागू आपराधिक कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में लगाई गई धाराओं और आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आरोपी ने बच्चे का पीछा क्यों किया और उसके मोबाइल फोन से तस्वीरें तथा वीडियो बनाने के पीछे उसका उद्देश्य क्या था। शुरुआती आरोपों में यौन मंशा की आशंका जताई गई है, लेकिन इसे जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए। पुलिस आरोपी के कथित व्यवहार और डिजिटल सामग्री की जांच के आधार पर इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

आरोपी का मोबाइल फोन भी जांच के लिए महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है। पुलिस यह देख सकती है कि फोन में बच्चे की तस्वीरें या वीडियो मौजूद हैं या नहीं और यदि मौजूद हैं तो उन्हें कब बनाया गया। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि आरोपी ने ऐसी सामग्री किसी अन्य व्यक्ति को भेजी या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा की थी या नहीं।

मामले में पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग से भी घटनाक्रम की पुष्टि कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आरोपी ने बच्चे का कितनी दूरी तक पीछा किया और वह रिहायशी परिसर में कैसे पहुंचा। इमारत में प्रवेश के समय सुरक्षा व्यवस्था और विजिटर रिकॉर्ड जैसी जानकारियां भी जांच में उपयोगी हो सकती हैं।

घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चे ने घर पहुंचने के बाद अपने माता-पिता को तुरंत संदिग्ध व्यक्ति के बारे में जानकारी दी। बच्चों से संबंधित सुरक्षा मामलों में अभिभावकों और स्कूलों की ओर से यह सलाह दी जाती है कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा पीछा करने, तस्वीर लेने, छूने, बातचीत के लिए दबाव डालने या कहीं साथ चलने के लिए कहने जैसी घटना होने पर बच्चा तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को बताए।

मामले में बच्चे की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। बच्चों से जुड़े कथित यौन अपराधों के मामलों में कानून पीड़ित नाबालिग की पहचान की सुरक्षा को विशेष महत्व देता है। इसलिए स्कूल या अन्य उपलब्ध विवरणों के आधार पर भी ऐसी जानकारी प्रकाशित करने से बचना चाहिए जिससे बच्चे की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सामने आ सके।

इसी वजह से समाचार प्रकाशित करते समय बच्चे के नाम, तस्वीर, घर के सटीक पते या परिवार की ऐसी जानकारी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जिससे उसकी पहचान संभव हो। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भी नाबालिग की निजता बनाए रखना आवश्यक है।

पुलिस अब आरोपी की पृष्ठभूमि और उसकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है। यह जांचा जा सकता है कि उसके खिलाफ पहले किसी तरह की शिकायत दर्ज हुई है या नहीं और वह संबंधित आवासीय परिसर में पहले भी आया था या नहीं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक अटकलों से बचना जरूरी है।

घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और रिहायशी परिसरों में बाहरी व्यक्तियों की निगरानी से जुड़े सवालों को सामने रखा है। स्कूल से घर लौटने वाले छोटे बच्चों के मामले में अभिभावकों, स्कूल वैन संचालकों और आवासीय सोसायटी के सुरक्षा कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।

फिलहाल आरोपी पुलिस की कार्रवाई का सामना कर रहा है और मामले की जांच जारी है। उस पर लगे आरोप अभी न्यायालय में साबित नहीं हुए हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर घटनाक्रम की पूरी कड़ी समझने का प्रयास कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चे का कथित रूप से पीछा करने और तस्वीरें-वीडियो बनाने के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी और उसके खिलाफ कौन-कौन से आरोप कानूनी रूप से कायम रहते हैं।

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