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जायंट व्हील में फंसे महिला के बाल, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

महाराष्ट्र : यवतमाल जिले में एक मेले के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने मनोरंजन के साधनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महागांव तहसील के फुलसावंगी गांव में आयोजित मेले में जायंट व्हील यानी आसमानी झूला झूल रही 25 वर्षीय महिला के बाल मशीन के घूमते हिस्से में फंस गए। झूले की तेज गति के कारण महिला के सिर में गंभीर चोट आई। वहां मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत झूला रुकवाया तथा घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
यह घटना शुक्रवार दोपहर लगभग तीन बजे फुलसावंगी स्थित पुनेश्वर मंदिर के पास आयोजित तान्हा पोला मेले में हुई। मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए अलग-अलग प्रकार के झूले लगाए गए थे। इसी दौरान फुलसावंगी की रहने वाली 25 वर्षीय बाली मारोती टालीकोटे जायंट व्हील पर बैठी थीं। झूला चलने के कुछ समय बाद उनके बाल कथित रूप से उसकी बेयरिंग अथवा घूमते यांत्रिक हिस्से में उलझ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक झूला तेज गति से घूम रहा था। इसलिए वहां मौजूद लोगों को हादसे को समझने और झूला रुकवाने के लिए बहुत कम समय मिला। मशीन के घूमते रहने के कारण महिला के बाल जोर से खिंचे और उनके सिर में गंभीर चोट आ गई। अचानक हुई इस घटना के बाद मेले में अफरा-तफरी मच गई। झूले पर बैठे अन्य लोग भी घबरा गए, जबकि नीचे खड़े लोगों ने संचालक को तत्काल मशीन बंद करने के लिए कहा।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर मौजूद सहायक पुलिस निरीक्षक सुनील अंभुरे और कांस्टेबल सुहास कायटे आगे आए। स्थानीय लोगों की सहायता से झूले को रुकवाया गया और महिला को सावधानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद एम्बुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें पुसद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के अनुसार महिला गंभीर रूप से घायल है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा है। उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर अस्पताल की ओर से कोई विस्तृत मेडिकल बुलेटिन सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हादसे के बाद मेले में लगाए गए झूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जायंट व्हील जैसे बड़े झूलों में कई यांत्रिक हिस्से लगातार तेज गति से घूमते हैं। यदि इन हिस्सों को सुरक्षा कवर से ढका नहीं गया हो या यात्रियों और मशीन के बीच पर्याप्त दूरी न रखी जाए तो कपड़े, बाल अथवा दूसरी वस्तु उसमें फंस सकती है। ऐसे झूलों पर बैठने से पहले संचालक की जिम्मेदारी होती है कि वह यात्रियों को आवश्यक सुरक्षा निर्देश दे और खतरे की संभावना वाली किसी भी चीज को सुरक्षित करने को कहे।
यह भी जांच का विषय है कि महिला के बाल झूले की बेयरिंग तक कैसे पहुंचे। आम तौर पर किसी भी बड़े यांत्रिक झूले के घूमते हिस्सों को यात्रियों की पहुंच से दूर रखा जाना चाहिए। सुरक्षा अवरोधक, सीट लॉक, आपातकालीन ब्रेक और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी ऐसे आयोजनों में बेहद जरूरी होती है। इसके बावजूद हादसा होना संकेत देता है कि या तो सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी या संचालन के दौरान आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।
मेला आयोजकों और झूला संचालक के पास उपकरण चलाने की अनुमति थी या नहीं, मशीन का फिटनेस परीक्षण कब कराया गया था और संचालन से पहले उसकी तकनीकी जांच हुई थी या नहीं—इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक जांच जरूरी मानी जा रही है। हादसे के संबंध में प्रशासन या झूला संचालक की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना होगा।
घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो रही हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए ऐसी विचलित करने वाली तस्वीरों और वीडियो को साझा करने से बचना चाहिए। इससे पीड़ित महिला तथा उनके परिवार की निजता प्रभावित हो सकती है। घटना की जानकारी देते समय संवेदनशील और गैर-ग्राफिक भाषा का इस्तेमाल करना भी आवश्यक है।
इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन के सामने मेलों में मनोरंजन उपकरणों की नियमित जांच की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया है। मेले अस्थायी अवधि के लिए लगाए जाते हैं और बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में झूलों की तकनीकी फिटनेस, बिजली की वायरिंग, ऑपरेटर का प्रशिक्षण, आपातकालीन ब्रेक और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जांच आयोजन शुरू होने से पहले होनी चाहिए। किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में झूले को तत्काल रोकने की व्यवस्था भी जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार बड़े झूलों पर बैठते समय लंबे बालों को अच्छी तरह बांधना चाहिए। ढीले दुपट्टे, स्कार्फ, चेन और ऐसे कपड़ों से बचना चाहिए जो मशीन के किसी हिस्से में फंस सकते हों। सीट पर बैठने के बाद सुरक्षा लॉक की जांच करनी चाहिए और झूला चलने के दौरान सीट से उठने या बाहर झुकने का प्रयास नहीं करना चाहिए। हालांकि यात्रियों की सावधानी के साथ सुरक्षित मशीन उपलब्ध कराना और संचालन के नियमों का पालन कराना आयोजक तथा संचालक की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
फुलसावंगी की घटना ने उत्सव के माहौल को चिंता में बदल दिया है। स्थानीय लोगों ने घायल महिला के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही मांग उठ रही है कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए। महिला का पुसद के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।





