महाराष्ट्र

NIA का DIG बनकर महिला से 61 लाख की ठगी

Kavita2
18 Oct 2026 10:35 AM IST
NIA का DIG बनकर महिला से 61 लाख की ठगी
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मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक शातिर साइबर जालसाज ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का वरिष्ठ अधिकारी बनकर 67 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला को आतंकवादियों की फंडिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी और उनसे 61 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी ने खुद को एनआईए का डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) बताते हुए दावा किया कि महिला के नाम पर खुले बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, उसने महिला को गिरफ्तार करने की धमकी दी और मामला खत्म कराने के नाम पर पैसे मांगे। ठग ने महिला को इतना डरा दिया कि उसने सोने के गहने गिरवी रखकर लोन लेने तक का दबाव बनाया। पीड़िता की शिकायत पर मुंबई की खार पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

1 अक्टूबर को आया था फर्जी एनआईए अधिकारी का फोन

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता 67 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला हैं और कोलकाता में रहती हैं। उनके दो बच्चे मुंबई के बांद्रा वेस्ट इलाके में रहते हैं।

एक अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 9 बजकर 35 मिनट पर महिला के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का व्हाट्सएप कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी का डीआईजी बताया।

आरोपी ने दावा किया कि उसका कार्यालय मुंबई के कोलाबा इलाके में स्थित है और वह एक गंभीर आपराधिक मामले की जांच कर रहा है।

शुरुआत में महिला को यह समझ नहीं आया कि उनसे किस मामले में संपर्क किया गया है। लेकिन आरोपी ने सरकारी जांच एजेंसी का नाम लेकर बातचीत शुरू की, जिससे महिला घबरा गई।

आतंकियों को पैसे भेजने का लगाया झूठा आरोप

एफआईआर के अनुसार, जालसाज ने महिला से कहा कि मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित कैनरा बैंक की एक शाखा में उनके नाम से बैंक खाता खोला गया है।

आरोपी का दावा था कि इस बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादियों को पैसे भेजने के लिए किया जा रहा है।

महिला ने ऐसे किसी खाते या आतंकवादी गतिविधि से संबंध होने से इनकार किया। इसके बावजूद आरोपी लगातार उन पर दबाव बनाता रहा।

उसने दावा किया कि महिला के खिलाफ अंधेरी में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अदालत से गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है।

जालसाज ने चेतावनी दी कि यदि महिला ने उसकी बात नहीं मानी तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।

पुलिस की पिटाई का वीडियो भेजकर डराया

महिला को भयभीत करने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर एक वीडियो भी भेजा।

इस वीडियो में पुलिसकर्मियों जैसे दिखाई देने वाले चार व्यक्ति एक अन्य व्यक्ति की पिटाई करते नजर आ रहे थे।

आरोपी ने महिला से कहा कि वीडियो में जिस व्यक्ति की पिटाई हो रही है, वह भी आतंकवादियों की फंडिंग से जुड़े मामले में पकड़ा गया था।

इस वीडियो के जरिए महिला को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि यदि उसने आरोपी के निर्देश नहीं माने तो उसके साथ भी ऐसा व्यवहार हो सकता है।

महिला ने बार-बार खुद को निर्दोष बताया। लेकिन आरोपी ने यह दावा करते हुए दबाव बनाए रखा कि उसके पास महिला का आधार नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी मौजूद है।

किसी को बताने और घर से निकलने पर लगाई रोक

जालसाज ने महिला को निर्देश दिया कि वह इस मामले के बारे में किसी भी व्यक्ति को जानकारी न दे।

आरोपी ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने और किसी रिश्तेदार या परिचित से बातचीत नहीं करने की हिदायत दी।

इस तरह आरोपी ने महिला को लगातार मानसिक दबाव में रखने की कोशिश की।

साइबर ठगी की इस पद्धति को आमतौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जाता है। इसमें अपराधी पुलिस, सीबीआई, एनआईए या अन्य जांच एजेंसी के अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं।

वे पीड़ितों को किसी गंभीर अपराध में फंसने का झूठा दावा करके बातचीत गोपनीय रखने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।

हालांकि, भारत में पुलिस या किसी जांच एजेंसी द्वारा व्हाट्सएप कॉल पर इस तरह डिजिटल अरेस्ट करने की कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं है।

सोने के गहने गिरवी रखकर लोन लेने को कहा

आरोपी ने महिला पर पैसे देने का लगातार दबाव बनाया। उसने कथित मामले को सुलझाने के नाम पर बड़ी रकम की मांग की।

जब महिला के पास पर्याप्त पैसे नहीं होने की बात सामने आई तो आरोपी ने उन्हें सोने के गहने गिरवी रखने और गोल्ड लोन लेने का सुझाव दिया।

गिरफ्तारी के डर और लगातार मिल रही धमकियों के कारण महिला आरोपी की बातों में आ गईं।

पुलिस के अनुसार, महिला ने अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कुल 61 लाख रुपये जालसाज को ट्रांसफर कर दिए।

इतनी बड़ी रकम गंवाने के बावजूद महिला शुरुआत में अपने परिवार को घटना की जानकारी नहीं दे सकीं। आरोपी ने उन्हें इस हद तक डरा दिया था कि वह पुलिस की कथित कार्रवाई से बचने के लिए उसके निर्देशों का पालन करती रहीं।

14 अक्टूबर को बेटी को बताई पूरी घटना

लगातार मानसिक दबाव और आर्थिक नुकसान के बाद महिला ने आखिरकार 14 अक्टूबर को अपनी बेटी को पूरी घटना की जानकारी दी।

बेटी को जब पता चला कि किसी व्यक्ति ने खुद को एनआईए अधिकारी बताकर उनकी मां से 61 लाख रुपये ले लिए हैं, तो उसे साइबर ठगी का संदेह हुआ।

उसने अपनी मां को समझाया कि कोई भी वास्तविक जांच एजेंसी इस तरह फोन करके गिरफ्तारी से बचाने के लिए पैसे नहीं मांगती।

इसके बाद पीड़िता और उनके परिजन मुंबई की खार पुलिस के पास पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

खार पुलिस ने शुरू की साइबर ठग की तलाश

पुलिस अब आरोपी की पहचान और महिला से ठगे गए 61 लाख रुपये के लेनदेन की जांच कर रही है।

जांच में व्हाट्सएप कॉल से संबंधित जानकारी, रकम भेजे गए बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि इस ठगी में केवल एक व्यक्ति शामिल था या इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह काम कर रहा था।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आरोपी की गिरफ्तारी या ठगी गई रकम बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी किस प्रकार सरकारी जांच एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को डराते हैं।

यदि कोई अनजान व्यक्ति स्वयं को पुलिस, एनआईए या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देता है और पैसे मांगता है, तो ऐसे दावों की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए।

किसी भी अज्ञात व्यक्ति को बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या व्यक्तिगत दस्तावेज साझा नहीं करने चाहिए।

साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है।

फिलहाल मुंबई की खार पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। 67 वर्षीय महिला से 61 लाख रुपये की इस ठगी ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के तरीकों पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

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