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NCP के विलय की चर्चा तेज
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल की शरद पवार से अस्पताल में मुलाकात और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बयान के बाद दोनों गुटों के एक होने की अटकलों को नया बल मिला है। हालांकि, अभी तक विलय को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रफुल्ल पटेल ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। मुलाकात शरद पवार का हालचाल जानने के लिए हुई थी, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब एनसीपी के भविष्य और संगठनात्मक एकता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
इस बीच सुनील तटकरे के एक बयान ने विलय की चर्चा को और तेज कर दिया। तटकरे ने कहा कि यदि अजित पवार जीवित होते, तो दोनों गुटों के विलय को 12 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप दिया जा सकता था। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि पहले दोनों पक्षों के बीच एकीकरण को लेकर गंभीर स्तर पर बातचीत हुई थी।
एनसीपी में विभाजन की शुरुआत जुलाई 2023 में हुई थी, जब अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ महाराष्ट्र की तत्कालीन महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। एक गुट अजित पवार के नेतृत्व में रहा, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व शरद पवार ने किया। चुनाव आयोग ने बाद में मूल एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न अजित पवार के गुट को दिया था।
28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान दोनों गुटों के विलय को लेकर पहले हुई बातचीत की जानकारी भी सामने आई। शरद पवार ने जनवरी में बताया था कि अजित पवार और जयंत पाटिल के स्तर पर दोनों गुटों को एक करने की बातचीत चल रही थी। हालांकि, अजित पवार के निधन से यह प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके बाद संगठन के नेतृत्व और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।
विलय की चर्चाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एनसीपी नेताओं की मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दो नवंबर को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह से मुलाकात की थी। रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में पार्टी के भविष्य और दोनों गुटों के संभावित एकीकरण पर चर्चा हुई। हालांकि, एनसीपी के प्रवक्ता ने इस बैठक को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक अनुमानों पर आपत्ति जताई थी।
राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि दोनों गुटों के एक होने की स्थिति में महाराष्ट्र के सत्ता समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा। वर्तमान में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट महायुति सरकार का हिस्सा है, जबकि शरद पवार का गुट विपक्षी राजनीति से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विलय की किसी भी संभावना के साथ गठबंधन की दिशा और संगठन के नेतृत्व का सवाल भी जुड़ा हुआ है। दोनों गुटों के भीतर इस मुद्दे पर एक जैसी राय होने की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार तत्काल विलय के पक्ष में नहीं माने जा रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ वरिष्ठ नेता दोनों गुटों को साथ लाने की संभावना तलाश रहे हैं।
एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय से महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह संभावना चर्चाओं और राजनीतिक संपर्कों तक सीमित है। किसी भी अंतिम फैसले के लिए दोनों पक्षों के नेतृत्व की सहमति आवश्यक होगी। अब सबकी नजर शरद पवार, सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में इन नेताओं के बयान और बैठकों से स्पष्ट हो सकेगा कि एनसीपी के दोनों गुट फिर एक होंगे या महाराष्ट्र की राजनीति में अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ेंगे।
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