महाराष्ट्र

माल्या की संपत्ति से पूरा कर्ज वसूला या नहीं

Ratna Netam
14 Aug 2026 2:23 PM IST
माल्या की संपत्ति से पूरा कर्ज वसूला या नहीं
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मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की जब्त संपत्तियों और बैंकों के बकाया कर्ज की वसूली को लेकर भारतीय स्टेट बैंक और प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या ईडी द्वारा जब्त की गई माल्या की चल संपत्तियों को बेचकर बैंकों का पूरा कर्ज चुकाया जा चुका है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने विजय माल्या की वर्ष 2020 में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
विजय माल्या ने अपनी याचिका में विशेष अदालत के वर्ष 2019 के एक आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश के तहत एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को माल्या की जब्त संपत्तियों का उपयोग कर्ज की वसूली के लिए करने की अनुमति दी गई थी। इन संपत्तियों में यूनाइटेड ब्रेवरीज समूह के शेयरों सहित कई चल संपत्तियां शामिल थीं। इस आदेश के बाद बैंकों ने जब्त संपत्तियों की बिक्री और नीलामी के माध्यम से अपने बकाया धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू की थी।
सुनवाई के दौरान विजय माल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई अदालत में पेश हुए। उन्होंने पीठ को बताया कि वर्ष 2020 के बाद हुए घटनाक्रमों के कारण अब यह याचिका प्रभावी रूप से निरर्थक हो चुकी है। माल्या के वकील ने दावा किया कि बैंकों के समूह ने ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों की बिक्री और नीलामी से करीब 15 हजार करोड़ रुपये की वसूली कर ली है। दूसरी तरफ, बैंकों का मूल दावा ब्याज सहित करीब 6,203 करोड़ रुपये का था।
अधिवक्ता अमित देसाई ने इस आधार पर तर्क दिया कि विजय माल्या की देनदारियों का पूरी तरह निपटारा हो चुका है। उन्होंने अदालत से कहा कि जब बैंकों ने अपने दावे से कहीं अधिक राशि वसूल कर ली है तो वर्ष 2019 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अब आगे सुनवाई करने का औचित्य नहीं बचता। हालांकि, अदालत ने इस दलील को तत्काल स्वीकार करने के बजाय संबंधित बैंक और जांच एजेंसी से वास्तविक स्थिति की पुष्टि कराना आवश्यक माना।
न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने कहा कि किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एसबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से सीधे जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए। अदालत ने एसबीआई और ईडी के उप निदेशक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों को हाईकोर्ट के सामने यह बताना होगा कि माल्या की जब्त संपत्तियों से कितनी राशि प्राप्त हुई और क्या उससे बैंकों के सभी बकाया दावों का पूरी तरह भुगतान हो चुका है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में केवल एसबीआई और ईडी को नोटिस जारी करना उचित होगा। इन दोनों का पक्ष सामने आने के बाद ही अदालत माल्या की याचिका में आगे की कार्रवाई पर निर्णय करेगी। जरूरत पड़ने पर बाद में मामले से जुड़े अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी किए जाने पर विचार किया जा सकता है। हाईकोर्ट का मानना है कि संबंधित संस्थाओं से सटीक आंकड़े प्राप्त होने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि याचिका वास्तव में निरर्थक हो चुकी है या इसमें सुनवाई जारी रखने की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट ने विजय माल्या को एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की अनुमति भी दी है। इस हलफनामे में उन्हें वर्ष 2020 से लेकर अब तक मामले में हुए घटनाक्रमों, संपत्तियों की बिक्री, बैंकों द्वारा की गई वसूली और देनदारियों से संबंधित विवरण प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई नौ सितंबर को होने की संभावना है।
विजय माल्या पर बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए विभिन्न बैंकों से लिए गए करीब नौ हजार करोड़ रुपये के ऋण से जुड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। उन पर कुल ऋण में से कम से कम 3,500 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए वर्ष 2016 से उनकी संपत्तियों को जब्त करना शुरू किया था। अब एसबीआई और ईडी के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्तियों की बिक्री से वास्तव में कितनी वसूली हुई और बैंकों का पूरा बकाया समाप्त हुआ है या नहीं।
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