महाराष्ट्र

जब नरेश अय्यर ने जीता एआर रहमान का दिल, एक मौके ने रातोंरात बना दिया स्टार

SHIDDHANT
2 Jan 2026 10:28 PM IST
जब नरेश अय्यर ने जीता एआर रहमान का दिल, एक मौके ने रातोंरात बना दिया स्टार
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Mumbai मुंबई। बॉलीवुड गानों का क्रेज विदेशों में भी खूब देखने को मिलता है। इन गानों को बनाने में संगीतकारों और गायकों की मेहनत लगी होती है। ऐसे ही एक युवा और शानदार गायकों में से एक हैं नरेश अय्यर। उनके गाने हर किसी का दिल छू लेते हैं। खास बात यह है कि नरेश ने अपने करियर की शुरुआत टीवी के रियलिटी शो 'सुपर सिंगर' से की थी।
उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी आवाज इतनी खास होगी कि खुद एआर रहमान जैसे बड़े संगीतकार उनके गाने सुनकर प्रभावित हो जाएंगे और फिल्मों में गाने का मौका देंगे। नरेश अय्यर का जन्म 3 जनवरी 1981 को मुंबई में हुआ। उनके माता-पिता खुद शास्त्रीय संगीत के गायक थे। घर में बचपन से ही संगीत का माहौल था, और नरेश ने इसे स्कूल की पढ़ाई की तरह सीखा।
उन्होंने छोटी उम्र से ही गायन में रुचि दिखाई और धीरे-धीरे अपनी आवाज और गायिकी को निखारा। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मन्ना डे उनके पसंदीदा गायक थे। इनके अलावा केके, चित्रा और एसपी बालासुब्रमण्यम जैसी आवाजों ने भी उनके संगीत की समझ को गहरा किया।
नरेश ने अपने करियर की शुरुआत करते हुए चैनल वी के 'सुपर सिंगर' शो में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता ने उनके जीवन का रुख बदल दिया। वहां उनकी आवाज को सुनकर एआर रहमान ने उन्हें फिल्म 'रंग दे बसंती' के लिए चुना। उनका गाया हुआ 'रुबरू' और 'पाठशाला' गाना काफी लोकप्रिय हुआ। उनकी आवाज में एक अलग तरह की ऊर्जा और मिठास थी, जिसने दर्शकों के साथ-साथ संगीतकारों का भी ध्यान खींचा।
इसके बाद, नरेश ने कई फिल्मों में गाने गाए। 'जाने तू या जाने ना' के गाने 'पप्पू कैंट डांस साला' और 'नजरें मिलाना नजरें चुराना' ने युवाओं के बीच उन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया। इसके अलावा, उन्होंने 'दिल्ली 6' में 'काला बंदर' जैसे गानों में भी अपनी गायिकी का जादू दिखाया। नरेश सिर्फ हिंदी में ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी गाना गा चुके हैं। मेहनत और प्रतिभा के चलते उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 'रुबरू' के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, और अपने करियर के पहले ही साल में उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।
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