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पुणे। पुणे जिले के कई हिस्सों में कम बारिश और लंबे सूखे के बाद आने वाले महीनों में पानी की संभावित कमी को देखते हुए जिला परिषद ने तैयारी तेज कर दी है। प्रशासन ने गांव-वार जरूरी कामों की सूची बनानी शुरू कर दी है, ताकि जहां पानी की उपलब्धता तेजी से घट रही है वहां प्राथमिकता के आधार पर राहत और जल संरक्षण से जुड़े काम किए जा सकें।
महाराष्ट्र सरकार ने पुणे जिले के बारामती, इंदापुर, दौंड, शिरूर, पुरंदर, खेड़, वेल्हे और भोर तालुकाओं को सूखा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया है। इन इलाकों में बारिश की कमी 25 प्रतिशत से अधिक रही और कई स्थानों पर लगातार 21 दिन या उससे अधिक का ड्राई स्पेल दर्ज किया गया।
पुणे जिला परिषद के अधिकारी अब इन आठों तालुकाओं में गांव स्तर पर पानी की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। इसके लिए कृषि, पशुपालन, लघु सिंचाई और निर्माण विभागों के अधिकारियों से जानकारी मांगी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि वास्तविक जरूरतों के आधार पर काम तय किए जा सकें।
प्रशासन का फोकस ऐसे गांवों पर है जहां जलस्रोतों का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, कुएं सूखने लगे हैं या भविष्य में टैंकर से पानी पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है। गांव-वार सूची में तालाबों की मरम्मत, छोटे बांधों की सफाई, जलस्रोतों का गहरीकरण, पाइपलाइन सुधार, पेयजल व्यवस्था और अन्य जरूरी काम शामिल किए जा सकते हैं।
इस बार पुणे जिले में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। जिले के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों की स्थिति अलग-अलग रही। सामान्य रूप से पर्याप्त बारिश पाने वाले खेड़, वेल्हे और भोर जैसे तालुके भी इस बार सूखा प्रभावित सूची में शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर शिरूर, दौंड, इंदापुर और बारामती जैसे अपेक्षाकृत सूखे इलाकों में कम बारिश के कारण पानी और खेती दोनों पर दबाव बढ़ा है।
कृषि विभाग की ओर से भी इन आठ तालुकाओं में फसल नुकसान का गांव और खेत स्तर पर आकलन शुरू किया गया है। करीब 1.25 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल प्रभावित होने का अनुमान है। कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में पहुंचकर पंचनामा कर रहे हैं, हालांकि फील्ड कर्मचारियों की कमी के कारण इस प्रक्रिया में समय लगने की आशंका भी जताई गई है।
पानी की कमी का सीधा असर खेती पर भी पड़ रहा है। कई इलाकों में अगस्त और सितंबर के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई। इससे प्याज, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। पुरंदर में सब्जी उत्पादकों और शिरूर-दौंड में प्याज किसानों को पानी की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा है।
जिला परिषद के अधिकारियों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता और घटी तो ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभी से उन कामों की पहचान की जा रही है जिन्हें तुरंत शुरू किया जा सके। इसका उद्देश्य गर्मी आने से पहले ज्यादा से ज्यादा तैयारी पूरी करना है।
लघु सिंचाई विभाग को छोटे जलाशयों, बंधारों और अन्य संरचनाओं की स्थिति की समीक्षा करने को कहा गया है। जिन स्थानों पर मरम्मत या गहरीकरण की जरूरत है, उन्हें प्राथमिक सूची में रखा जा सकता है। निर्माण विभाग सड़कों और अन्य संरचनाओं के साथ ऐसी जगहों की जानकारी भी दे रहा है जहां पाइपलाइन या जलापूर्ति संबंधी काम जरूरी हो सकते हैं।
पशुपालन विभाग से भी उन क्षेत्रों की जानकारी मांगी जा रही है जहां पशुओं के लिए पानी और चारे की समस्या बढ़ सकती है। सूखे के दौरान केवल किसानों की फसल ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि मवेशियों के लिए पेयजल और चारे की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन जाती है।
इधर सिंचाई विभाग ने कम बारिश को देखते हुए रबी फसलों के लिए खड़कवासला बांध से पानी सामान्य समय से लगभग तीन सप्ताह पहले छोड़ना शुरू किया है। यह पानी मुठा नहर के माध्यम से इंदापुर, दौंड और हवेली के उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है जहां लंबे समय तक सूखा रहा है।
पानी की चोरी और अवैध उठाव रोकने के लिए मुठा नहर पर निगरानी भी बढ़ाई गई है। अधिकारियों ने करीब 100 किलोमीटर लंबे नहर मार्ग पर विशेष टीमों को तैनात किया है, ताकि उपलब्ध पानी का समान वितरण सुनिश्चित किया जा सके। जरूरत पड़ने पर अवैध पंपों की बिजली आपूर्ति काटने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इससे पहले मानसून की शुरुआत में भी पुणे जिले के ग्रामीण हिस्सों में जल संकट देखा गया था। जून में 114 गांवों की करीब 1.93 लाख आबादी तक 124 टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा था। उस समय पुरंदर, खेड़, इंदापुर और शिरूर सहित कई क्षेत्रों में टैंकरों की जरूरत पड़ी थी।
अब प्रशासन की कोशिश है कि पानी की कमी गंभीर होने से पहले ही हर गांव की जरूरत का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार हो जाए। गांव-वार सूची बनने के बाद यह तय करना आसान होगा कि किस स्थान पर किस प्रकार का काम सबसे पहले किया जाना चाहिए और उसके लिए कितनी राशि तथा संसाधनों की जरूरत होगी।
राज्य सरकार ने पूरे महाराष्ट्र के 265 तालुकाओं को सूखा प्रभावित घोषित किया है। सरकार ने जिलों को जल बजट तैयार करने और किसानों तथा ग्रामीण आबादी की जरूरतों के अनुसार राहत योजना बनाने को भी कहा है।
पुणे जिला परिषद की मौजूदा कवायद इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है। अधिकारी अलग-अलग विभागों से मिलने वाली जानकारी को एक जगह संकलित कर प्राथमिकता सूची तैयार करेंगे। इसके बाद उपलब्ध बजट और जरूरत के अनुसार काम शुरू किए जाएंगे।
फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता पेयजल, सिंचाई और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखना है। आठ सूखा प्रभावित तालुकाओं में गांव-वार योजना तैयार होने के बाद स्थानीय स्तर पर जरूरी काम तेजी से शुरू किए जाने की उम्मीद है।
असमान बारिश और लगातार सूखे ने इस बार पुणे जिले के कई ऐसे क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है जहां सामान्यतः पानी की स्थिति बेहतर रहती है। ऐसे में जिला परिषद की योजना का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में संभावित जल संकट से निपटने के लिए पहले से मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।





