महाराष्ट्र

फडणवीस को चेतावनी, Thackeray ने उठाए सवाल

Kanchan Paikara
23 Jun 2026 3:55 PM IST
फडणवीस को चेतावनी, Thackeray ने उठाए सवाल
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Mumbai :शिवसेना (यूबीटी) में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां पार्टी के 9 में से 6 सांसदों ने पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद शिंदे की मौजूदगी में उनकी पार्टी में शामिल हुए, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

इस बड़े बदलाव के बाद शिवसेना (यूबीटी) खेमे में असंतोष और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि उन्होंने सीधे बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय के जरिए इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया गया है।

‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में इस राजनीतिक घटनाक्रम पर व्यंगात्मक तरीके से टिप्पणी की गई है और इसे लेकर शिंदे गुट पर निशाना साधा गया है। संपादकीय में यह भी संकेत दिया गया कि यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संगठनात्मक कमजोरियों का परिणाम है, जिस पर गंभीर मंथन की जरूरत है।

सूत्रों के अनुसार, जिन 6 सांसदों ने शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट का साथ दिया है, वे लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे थे। हालांकि, इस बदलाव के बाद पार्टी में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि लोकसभा में पार्टी की संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट आई है।

उधर, शिंदे गुट की ओर से इस घटनाक्रम को अपनी राजनीतिक ताकत में वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि विभिन्न जनप्रतिनिधियों का उनके साथ जुड़ना जनता के समर्थन और विकास कार्यों की स्वीकृति को दर्शाता है।

महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब सभी दल आगामी रणनीतियों की तैयारी में जुटे हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के दल-बदल आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक समीकरणों को और भी प्रभावित कर सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में स्थिरता की स्थिति बन पाएगी या आने वाले समय में और भी राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेंगे।

कुल मिलाकर, शिवसेना (यूबीटी) से 6 सांसदों का शिंदे गुट में जाना राज्य की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसने सभी राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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