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Mumbai मुंबई: (महाराष्ट्र)। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के हालिया बयान पर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। AIMIM के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने उन पर करारा पलटवार करते हुए कहा है कि “मुफ्त में सलाह देना दुनिया का सबसे आसान काम है। प्रशांत किशोर खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ते? क्योंकि वे डरते हैं।” पठान ने कहा कि राजनीति सिर्फ मंच से भाषण देने या टीवी इंटरव्यू में बयान देने का खेल नहीं है — जनता के बीच उतरकर संघर्ष करना पड़ता है। वारिस पठान ने मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “प्रशांत किशोर लगातार नेताओं और पार्टियों को सलाह देते हैं कि कौन जीतेगा, कौन हारेगा, कौन जनता के साथ है और कौन नहीं। लेकिन वे खुद कभी जनता के बीच जाकर चुनाव नहीं लड़ते। अगर उनमें हिम्मत है, तो वे खुद मैदान में उतरें और देख लें कि जनता उन्हें कितना स्वीकार करती है।”
AIMIM नेता का तंज
पठान ने कहा कि प्रशांत किशोर राजनीति को प्रयोगशाला की तरह देख रहे हैं। “उन्होंने कभी राजनीति की धरातली सच्चाई नहीं समझी। जनता के बीच जाकर संघर्ष करना और उनके मुद्दों के लिए आवाज उठाना अलग बात है, जबकि मीडिया में बयान देना और राजनीतिक समीकरण बताना आसान है,” उन्होंने कहा। वारिस पठान ने यह भी कहा कि जन सुराज पार्टी को अब तक किसी बड़े राज्य में जनता का समर्थन नहीं मिला है, क्योंकि पार्टी का नेतृत्व जमीन पर सक्रिय नहीं है। “किशोर को समझना चाहिए कि चुनाव केवल आंकड़ों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते, बल्कि जनता के विश्वास से जीते जाते हैं,” उन्होंने कहा।
प्रशांत किशोर का बयान और पृष्ठभूमि
दरअसल, प्रशांत किशोर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि “देश की राजनीति में बदलाव तभी आएगा जब जनता नए विकल्पों को स्वीकार करेगी और पुरानी पार्टियों की पकड़ कमजोर होगी।” उन्होंने विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठाए थे। उनके इसी बयान के बाद AIMIM समेत कई दलों के नेताओं ने उन पर निशाना साधा।
प्रशांत किशोर, जो देशभर में कई चुनावी अभियानों के रणनीतिकार रह चुके हैं, ने 2022 में अपनी नई राजनीतिक पार्टी जन सुराज पार्टी की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वे बिहार से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगे, लेकिन अब तक किसी चुनाव में स्वयं उम्मीदवार के रूप में नहीं उतरे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
वारिस पठान के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान प्रशांत किशोर की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता पर प्रतिक्रिया है। वहीं, AIMIM ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किशोर को नीचा दिखाना नहीं बल्कि यह याद दिलाना है कि राजनीति केवल ‘सामाजिक प्रयोग’ नहीं है।
जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया में चर्चा
सोशल मीडिया पर भी वारिस पठान के बयान को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूज़र्स ने AIMIM नेता के बयान का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने प्रशांत किशोर को “नीतिगत सुधारक” बताते हुए कहा कि उनका काम राजनीति को दिशा देना है, न कि खुद सत्ता में आना।
इस बयानबाजी से एक बार फिर साफ हो गया है कि देश की राजनीति में प्रशांत किशोर की भूमिका सिर्फ एक रणनीतिकार तक सीमित नहीं रही है — बल्कि वे अब एक ऐसे व्यक्ति बन चुके हैं, जिनकी बात पर लगभग हर राजनीतिक दल प्रतिक्रिया देता है।
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