महाराष्ट्र

बाढ़ में दरवाजा बना स्ट्रेचर, ग्रामीणों ने बचाई गर्भवती की जान

Kavita2
10 July 2026 4:19 PM IST
बाढ़ में दरवाजा बना स्ट्रेचर, ग्रामीणों ने बचाई गर्भवती की जान
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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में मानसून की भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। इसी बीच पालघर जिले से मानवता और ग्रामीणों की सूझबूझ की एक तस्वीर सामने आई है, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क टूटने के बाद गांव वालों ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया।

एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंच पाने की स्थिति में ग्रामीणों ने लकड़ी के दरवाजे को ही अस्थायी स्ट्रेचर बना दिया और गर्भवती महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया।

प्रसव पीड़ा के बीच बढ़ी परेशानी

जानकारी के मुताबिक, पालघर जिले के हनुमानपाड़ा गांव निवासी प्रियंका यादव को मंगलवार, 7 जुलाई को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार के लोग उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उस समय इलाके में भारी बारिश के कारण हालात बेहद खराब थे।

लगातार बारिश के चलते गांव की ओर जाने वाली सड़कें पानी में डूब गई थीं। कई रास्तों पर पानी का तेज बहाव था, जिसके कारण गांव का संपर्क लगभग कट गया था।

परिवार ने महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन खराब रास्तों और जलभराव के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

मां और बच्चे की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

गर्भवती महिला की हालत को देखते हुए परिवार और ग्रामीणों की चिंता बढ़ने लगी। प्रसव का समय नजदीक होने के कारण महिला को जल्द चिकित्सा सहायता की जरूरत थी।

गांव वालों ने हालात को देखते हुए खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने आसपास मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए लकड़ी के दरवाजे को स्ट्रेचर की तरह तैयार किया।

इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर प्रियंका यादव को उस पर लिटाया और पानी भरे रास्तों से होते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया।

ग्रामीणों की सूझबूझ से मिली मदद

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आपदा के समय स्थानीय लोग किस तरह एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और गर्भवती महिला को समय पर इलाज दिलाने की कोशिश की।

ग्रामीणों के इस प्रयास की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना की जा रही है।

मानसून में बढ़ी मुश्किलें

महाराष्ट्र में मानसून के दौरान कई जिलों में भारी बारिश हो रही है। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के कारण सड़कें खराब होने, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने तथा संपर्क मार्ग बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

पालघर जैसे कई जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बारिश के मौसम में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

बारिश के दौरान दूरदराज के इलाकों में आपातकालीन सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों के प्रयास की हो रही प्रशंसा

पालघर की इस घटना में ग्रामीणों की एकजुटता और मानवता की मिसाल देखने को मिली। जब सरकारी मदद समय पर नहीं पहुंच सकी, तब ग्रामीणों ने अपनी समझदारी और मेहनत से महिला को सहायता पहुंचाने का रास्ता निकाला।

बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों में ऐसे प्रयास लोगों के बीच सहयोग और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हैं।

फिलहाल महिला और उसके स्वास्थ्य से जुड़ी आगे की जानकारी का इंतजार है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि मानसून के दौरान दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।

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