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महाराष्ट्र
पुणे के अस्पताल का वीडियो वायरल, पोस्टमार्टम विभाग में मिली शराब की बोतलें
nidhi
17 Oct 2026 8:38 AM IST

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पोस्टमार्टम विभाग के वीडियो पर प्रशासन की कार्रवाई
पुणे: पिंपरी-चिंचवड़ स्थित यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल के पोस्टमार्टम विभाग में कथित शराब पार्टी का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। नगर आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. वैभव म्हस्के को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि जिस समय मृतक के परिजन शव और जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार कर रहे थे, उसी दौरान विभाग के भीतर शराब का सेवन किया जा रहा था। घटना ने अस्पताल में कर्मचारियों के आचरण और संवेदनशील सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
सामने आई जानकारी के अनुसार, कार्रवाई का आधार बना वीडियो तीन अक्टूबर को रिकॉर्ड किया गया था। उस दिन धाराशिव जिले के एक दिहाड़ी मजदूर का थेरगांव में निर्माण स्थल पर हादसा हुआ था। उन्हें अस्पताल लाए जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने का इंतजार कर रहे थे। मृतक के एक परिचित का दावा है कि परिवार को रातभर रुकना पड़ा और इसी दौरान वीडियो बनाया गया।
वायसीएमच्या शवविच्छेदन विभागात दारू पार्टी, मद्याचे पेग, चकना अन् जेवणाची ताट! धक्कादायक व्हिडीओ समोर #Punenews #YCMhospital #Video #PimpriChinchwad #YCMHospital https://t.co/UELzSgltj4
— Ankita Shantinath Khane (@KhaneAnkita) October 16, 2026
वीडियो के प्रकाशित विवरणों के मुताबिक, विभाग के भीतर एक मेज पर शराब की बोतल, गिलास और खाने-पीने का सामान दिखाई देता है। पास के सोफे पर एक व्यक्ति लेटा हुआ नजर आता है। रिकॉर्डिंग करने वाला व्यक्ति उसे जगाने की कोशिश करते हुए प्रमाणपत्र और कागजात के बारे में पूछता सुनाई देता है। हालांकि, वीडियो के दृश्य और उनसे लगाए जा रहे आरोपों की पूरी जांच जरूरी है। विभागीय कार्रवाई में संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और उस समय की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जारी निलंबन आदेश से संबंधित जानकारी के अनुसार, डॉ. म्हस्के पर ड्यूटी के दौरान नशे में होने और आवश्यक अस्पताल सेवाओं को प्रभावित करने का आरोप है। अस्पताल के डीन ने घटना की जानकारी नगर प्रशासन को दी थी। इसके बाद तत्काल निलंबन और विभागीय जांच का निर्णय लिया गया। निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है; आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विभागीय प्रक्रिया में सामने आएगा।
प्रशासन ने कार्रवाई में सरकारी कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन से संबंधित नियमों का उल्लेख किया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान शराब सेवन अथवा उसके प्रभाव में रहने से जुड़े प्रावधानों को आधार बनाया गया है। अब जांच में ड्यूटी की जिम्मेदारी, काम में कथित बाधा और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। केवल वीडियो में दिखाई देने वाले हिस्से से बाहर की घटनाओं के बारे में अनुमान लगाकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
मामले में शव सौंपने के बदले पैसे मांगने का आरोप भी सामने आया है। मृतक के परिचित के अनुसार, परिवार से कहा गया था कि शव सुबह मिलेगा और रात में चाहिए तो भुगतान करना होगा। यह दावा गंभीर है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए कथित शराब सेवन और पैसे मांगने के आरोपों को अलग-अलग जांच के विषय के रूप में देखना जरूरी है। भुगतान मांगे जाने की बात को अभी प्रमाणित वसूली नहीं कहा जा सकता।
वीडियो सामने आने के शुरुआती चरण में अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक डीन मारुति गायकवाड़ ने जांच कराने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि वीडियो प्रशासन को मिला है और वास्तविक स्थिति समझने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। उस समय उन्होंने वीडियो में सोए दिखाई दे रहे चिकित्सा अधिकारी की पहचान के बारे में जानकारी नहीं होने की बात भी कही थी। इसके बाद सामने आए निलंबन के अपडेट से स्पष्ट है कि मामला शुरुआती पूछताछ से आगे विभागीय कार्रवाई तक पहुंच चुका है।
वाईसीएम अस्पताल पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के अधीन संचालित प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है। यहां आसपास के क्षेत्रों से भी लोग उपचार के लिए आते हैं। ऐसे संस्थान में मृत्यु के बाद की औपचारिकताएं पूरी कराने पहुंचे परिवार को स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदार कर्मचारी उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। इस घटना में देरी के कारणों और कर्मचारियों की जवाबदेही का निर्धारण जांच से होगा।
फिलहाल डॉक्टर का निलंबन और विभागीय जांच का आदेश प्रमुख पुष्ट कार्रवाई है। आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होगा कि ड्यूटी के दौरान क्या हुआ, परिजनों को कितनी देरी हुई और पैसे मांगने के आरोपों में क्या तथ्य हैं। संबंधित डॉक्टर का विस्तृत पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
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