महाराष्ट्र

Versova-बांद्रा सी लिंक ने सात साल बाद 32% सिविल प्रोग्रेस हासिल की

Kavita2
23 April 2026 10:45 AM IST
Versova-बांद्रा सी लिंक ने सात साल बाद 32% सिविल प्रोग्रेस हासिल की
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Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़ी एक अहम परियोजना वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक (VBSL) की प्रगति को लेकर नया अपडेट सामने आया है। लंबे समय से निर्माणाधीन इस प्रोजेक्ट ने लगभग सात साल पूरे होने के बावजूद अपेक्षित गति नहीं पकड़ी है।

Versova-Bandra Sea Link की मौजूदा स्थिति के अनुसार अब तक कुल 32 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वित्तीय प्रगति लगभग 30 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है। यह आंकड़े परियोजना की धीमी गति को दर्शाते हैं और इसके समय पर पूरा होने को लेकर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना मूल रूप से वर्ष 2018 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और उसकी जॉइंट वेंचर पार्टनर एस्टाल्डी को दी गई थी। दोनों कंपनियों ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के तहत लगभग 7,000 करोड़ रुपये का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था। अनुबंध के अनुसार, परियोजना को 24 जून 2019 से 60 महीनों के भीतर पूरा किया जाना था।

हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न हुई बाधाओं और अन्य तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई। समय सीमा में विस्तार मिलने के बावजूद कंसोर्टियम अपेक्षित गति से काम नहीं कर सका, जिससे निर्माण कार्य में देरी बढ़ती गई।

बाद में स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अपने हिस्से को एस्टाल्डी को ट्रांसफर कर परियोजना से बाहर निकलने का निर्णय लिया। इसके बाद परियोजना की जिम्मेदारी एस्टाल्डी ग्रुप की वेबिल्ड कंपनी और APCO इंफ्राटेक के संयुक्त साझेदारी को सौंप दी गई। वर्तमान में यही कंसोर्टियम निर्माण कार्य को आगे बढ़ा रहा है।

सी लिंक परियोजना का उद्देश्य मुंबई के पश्चिमी उपनगरों के बीच यातायात को आसान बनाना और शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करना है। यह लिंक वर्सोवा से बांद्रा तक सीधा समुद्री मार्ग प्रदान करेगा, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

हालांकि, प्रगति की धीमी रफ्तार ने परियोजना की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तकनीकी जटिलताओं और बाहरी परिस्थितियों का प्रभाव अक्सर निर्माण गति पर पड़ता है।

मुंबई जैसे महानगर में इस तरह की परियोजनाएं ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसलिए अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नया कंसोर्टियम कितनी तेजी से काम पूरा कर पाता है।

फिलहाल, निर्माण कार्य जारी है और परियोजना के आगे बढ़ने के साथ इसकी प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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