महाराष्ट्र

वसई तहसील कार्यालय में रिश्वत का बड़ा मामला, ACB ने एजेंट को पकड़ा, अधिकारी फरार

Kavita2
22 April 2026 10:10 AM IST
वसई तहसील कार्यालय में रिश्वत का बड़ा मामला, ACB ने एजेंट को पकड़ा, अधिकारी फरार
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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के वसई तहसीलदार कार्यालय में एक बार फिर रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे राजस्व विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े हो गए हैं। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की ठाणे यूनिट ने मंगलवार दोपहर कार्रवाई करते हुए एक निजी व्यक्ति को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जबकि एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी मामले के बाद से फरार बताया जा रहा है।

ACB की जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान अनिल प्रभाकर चौबल के रूप में हुई है। उसे उस समय पकड़ा गया जब वह कथित रूप से ₹7 लाख की रिश्वत ले रहा था। यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वसई क्षेत्र में जमीन से जुड़े एक मामले को निपटाने के लिए अवैध रूप से पैसे की मांग की जा रही थी।

मामला जमीन पर बने अवैध निर्माण को गिराने से रोकने और भूमि के नॉन-एग्रीकल्चरल (NA) कन्वर्ज़न से जुड़े दस्तावेजों को आगे बढ़ाने से संबंधित है। शिकायत के अनुसार, शुरुआत में इस काम के लिए ₹40 लाख की मांग की गई थी, जिसे बाद में बातचीत के बाद घटाकर ₹7 लाख कर दिया गया।

ACB की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में वसई तहसील कार्यालय के अपर तहसीलदार (नॉन-एग्रीकल्चरल डिवीज़न) विनोद बालकृष्ण धोत्रे की भूमिका भी संदिग्ध है। हालांकि, कार्रवाई शुरू होने के बाद वह मौके से फरार हो गए और अब तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।ACB की टीम ने ट्रैप

कार्रवाई के दौरान अनिल चौबल को पैसे लेते हुए गिरफ्तार किया और मामले से जुड़े सबूत एकत्र किए। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह रिश्वतखोरी का नेटवर्क केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी स्तर पर भी कुछ लोगों की संलिप्तता हो सकती है।

घटना के बाद वसई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब फरार अधिकारी विनोद धोत्रे की तलाश में जुटी हुई है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

ACB अधिकारियों ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जाएगा कि रिश्वत की मांग किस स्तर तक और किन लोगों के माध्यम से की जा रही थी। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि क्या इससे पहले भी इसी तरह की अवैध वसूली के मामले सामने आए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर लंबी प्रक्रियाओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

कुल मिलाकर, वसई तहसील कार्यालय का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है, जहां रिश्वत के जरिए सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी हैं।

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