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महाराष्ट्र
मराठी नियम को लेकर मुंबई में बवाल ड्राइवरों के बीच बढ़ा तनाव
nidhi
25 Aug 2026 7:47 AM IST

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मराठी नियम का असर सड़क पर उतरा विरोध
मुंबई : महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। ऑटो और टैक्सी चालकों से जुड़ी भाषा नीति को लेकर शहर के कई इलाकों में तनाव की स्थिति देखने को मिली है। ड्राइवरों के विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और झड़प की घटनाओं ने मामले को और गरमा दिया है।
मामला तब बढ़ा जब मराठी भाषा के ज्ञान को लेकर ऑटो-टैक्सी चालकों की जांच और नोटिस की कार्रवाई शुरू हुई। कई ड्राइवरों का कहना है कि अचानक भाषा संबंधी नियम लागू होने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। वहीं, स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने वाले संगठनों का तर्क है कि महाराष्ट्र में काम करने वालों को मराठी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए।
कांदिवली में प्रदर्शन के दौरान झड़प
मुंबई के कांदिवली इलाके में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ, जहां कुछ जगहों पर विवाद और झड़प की स्थिति बन गई। प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि भाषा के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि किसी के खिलाफ भेदभाव नहीं किया जा रहा, बल्कि यात्रियों से बेहतर संवाद के लिए स्थानीय भाषा सीखने को कहा जा रहा है।
ड्राइवरों ने जताई रोजगार की चिंता
कई ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि वे वर्षों से मुंबई में काम कर रहे हैं और अचानक भाषा परीक्षा या कार्रवाई से उनके सामने परेशानी खड़ी हो गई है। कुछ यूनियनों ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी है। ड्राइवरों का कहना है कि भाषा सीखना कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि नियमों को लागू करने का तरीका परेशान करने वाला है।
सरकार ने दी सफाई
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मराठी सीखने की बात किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि भाषा के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ड्राइवरों को मराठी सीखने में मदद की जाएगी और उन्हें विशेषज्ञ स्तर की भाषा जानना जरूरी नहीं है।
भाषा और पहचान की राजनीति तेज
मुंबई में भाषा का मुद्दा नया नहीं है। शहर में रोजगार, प्रवास और स्थानीय पहचान को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। इस बार मामला सीधे परिवहन क्षेत्र से जुड़ गया है, जिससे आम यात्रियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषा का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि भाषा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी बनाए रखा जाए। फिलहाल मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों और भाषा नियमों को लेकर विवाद जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और ड्राइवर संगठनों के बीच बातचीत से ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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