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चीनी और आसवनी उद्योग की जरूरतों के अनुसार तकनीकी ज्ञान अपडेट करना जरूरी: प्रो. सीमा परोहा

Kavita2
25 Aug 2026 2:52 PM IST
चीनी और आसवनी उद्योग की जरूरतों के अनुसार तकनीकी ज्ञान अपडेट करना जरूरी: प्रो. सीमा परोहा
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कानपुर। चीनी एवं आसवनी उद्योग में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने कहा कि उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा देने के बजाय उन्हें औद्योगिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ भी दी जानी चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की वैज्ञानिक सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित विशेष व्याख्यान श्रृंखला के दौरान प्रो. परोहा ने शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीनी एवं आसवनी क्षेत्र लगातार नई तकनीकों को अपना रहा है और ऐसे में तकनीकी संस्थानों के पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षण प्रणाली में भी समय के साथ बदलाव जरूरी है।

उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हो अकादमिक बदलाव

प्रो. सीमा परोहा ने कहा कि चीनी और आसवनी उद्योग आज केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा दक्षता, उत्पादन लागत में कमी, गुणवत्ता नियंत्रण, इथेनॉल उत्पादन और पर्यावरणीय मानकों जैसे कई नए क्षेत्रों पर उद्योग का ध्यान बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अकादमिक स्तर पर भी विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराना संस्थान की प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को यदि पढ़ाई के दौरान ही आधुनिक संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और प्रक्रियाओं की जानकारी मिल जाए, तो वे उद्योग में काम शुरू करने के बाद परिस्थितियों के अनुसार जल्दी ढल सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच लगातार संवाद होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुभव और विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान के बीच बेहतर तालमेल से न केवल छात्रों की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सकेगा।

विशेषज्ञों ने साझा की आधुनिक तकनीकों की जानकारी

विशेष व्याख्यान श्रृंखला में चीनी एवं आसवनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ उत्पादन प्रक्रिया से संबंधित आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि मौजूदा समय में उत्पादन को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

व्याख्यान के दौरान गुणवत्ता सुधार, ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल, उत्पादन हानियों को कम करने, प्लांट अनुरक्षण, इथेनॉल उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे विषयों पर विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने समझाया कि उत्पादन के दौरान छोटी-छोटी तकनीकी कमियों का असर बड़े स्तर पर उत्पादन लागत और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए आधुनिक निगरानी प्रणाली और बेहतर प्रक्रिया नियंत्रण के माध्यम से उत्पादन हानि को कम किया जा सकता है।

ऊर्जा दक्षता पर जोर

चीनी उद्योग में ऊर्जा की खपत एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि आधुनिक तकनीकों की मदद से ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करते हुए उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्लांट की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल से उद्योग की लागत कम करने में भी मदद मिलती है। बदलते औद्योगिक वातावरण में ऊर्जा दक्षता केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि उत्पादन इकाइयों में नियमित अनुरक्षण और समय पर तकनीकी जांच किस तरह मशीनों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करती है। मशीनों के खराब होने की स्थिति में उत्पादन रुकने से होने वाले नुकसान को बेहतर प्लांट मैनेजमेंट के जरिए कम किया जा सकता है।

इथेनॉल उत्पादन में तकनीकी बदलाव

व्याख्यान श्रृंखला में इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर भी विशेष चर्चा हुई। भारत में चीनी उद्योग के साथ इथेनॉल उत्पादन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत भी बढ़ रही है।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इथेनॉल उत्पादन की प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से संबंधित तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर तकनीक और प्रक्रिया नियंत्रण के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार किया जा सकता है।

विद्यार्थियों को मिला उद्योग से जुड़ने का अवसर

विशेष व्याख्यान श्रृंखला विद्यार्थियों के लिए कक्षा से बाहर उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर भी बनी। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में काम करने के लिए केवल विषय का सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है।

विद्यार्थियों को मशीनरी, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच, ऊर्जा प्रबंधन और प्लांट संचालन जैसे क्षेत्रों की व्यावहारिक जानकारी भी होनी चाहिए। इससे वे रोजगार के दौरान सामने आने वाली वास्तविक समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ और उनका समाधान कर सकेंगे।

कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि भविष्य में चीनी एवं आसवनी उद्योग में तकनीकी दक्षता रखने वाले युवाओं की भूमिका और बढ़ेगी। नई तकनीकों को समझने और उन्हें व्यवहार में लागू करने की क्षमता विद्यार्थियों को उद्योग में बेहतर अवसर दिला सकती है।

उद्योग-शिक्षा के बीच तालमेल जरूरी

एनएसआई की निदेशक प्रो. परोहा के अनुसार, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा में लगातार बदलाव करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें उद्योग की वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करना है।

विशेष व्याख्यान श्रृंखला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही, जिसमें विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और उद्योग से जुड़े तकनीकी विषयों को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि आने वाले समय में चीनी और आसवनी उद्योग अधिक तकनीक आधारित होगा। ऐसे में विद्यार्थियों के कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकी ज्ञान को प्राथमिकता देना जरूरी है। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग को भी बेहतर प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

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