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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक और असामान्य बढ़ोतरी दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि सरकार को आशंका है कि ईंधन की जमाखोरी की जा रही है या फिर इसका उपयोग बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पेट्रोल पंपों के जरिए ईंधन की सप्लाई सामान्य से अधिक मात्रा में की जा रही है, इसके बावजूद कई क्षेत्रों में कमी जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सामान्य नहीं है और इसके पीछे किसी न किसी तरह की अनियमितता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में पेट्रोल की मांग औसत खपत से लगभग 23 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है, जबकि डीजल की मांग में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। यह वृद्धि सामान्य खपत पैटर्न से काफी अलग है, जिसके चलते सरकार ने इस पर नजर बनाए रखी है।
फडणवीस ने यह भी बताया कि कुछ जिलों में ईंधन की खपत में बेहद असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार अकोला जिले में पेट्रोल-डीजल की खपत में लगभग 154 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसी तरह छत्रपति संभाजीनगर और बीड जिलों में भी खपत 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।
सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी वृद्धि सामान्य उपभोक्ता मांग से मेल नहीं खाती, इसलिए इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं ईंधन का उपयोग बड़े पैमाने पर किसी अन्य उद्देश्य के लिए तो नहीं किया जा रहा है या फिर इसकी जमाखोरी तो नहीं हो रही है।
प्रशासनिक स्तर पर संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी पेट्रोल पंपों और सप्लाई चैन की जांच करें। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी क्षेत्र में अवैध भंडारण या अनधिकृत वितरण तो नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम जनता को ईंधन की उपलब्धता में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इस बीच, राज्य प्रशासन ने सभी जिलों में रिपोर्ट तलब की है और फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे असामान्य खपत के कारणों की विस्तृत जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपें।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में ईंधन की बढ़ती मांग ने सरकार को सतर्क कर दिया है और अब इस पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि यह वास्तव में बढ़ी हुई मांग है या किसी तरह की अनियमितता का परिणाम।





