महाराष्ट्र

पुणे में केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल का भावुक बयान, बोले

SHIDDHANT
4 Feb 2026 10:52 PM IST
पुणे में केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल का भावुक बयान, बोले
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Maharashtra महाराष्ट्र। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान भावुक बयान देते हुए कहा कि “दादा अब हमारे साथ नहीं रहे हैं और उनकी कमी हमें जीवन भर महसूस होती रहेगी।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। मुरलीधर मोहोल ने कहा कि दादा का व्यक्तित्व केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मार्गदर्शक, प्रेरणा स्रोत और संगठन को जोड़कर रखने वाली एक मजबूत कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दादा के साथ बिताए गए पल, उनसे मिली सीख और उनका अनुभव हमेशा स्मृतियों में जीवित रहेगा।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दादा का जाना न सिर्फ परिवार और करीबी लोगों के लिए, बल्कि समाज और राजनीतिक जीवन के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा, “ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जो अपने विचारों, आचरण और कर्मों से आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। दादा उन्हीं में से एक थे। मोहोल ने बताया कि दादा हमेशा संगठन और समाज के हित को सर्वोपरि रखते थे। वे निर्णय लेने में दृढ़ थे, लेकिन संवाद और सहमति को भी उतना ही महत्व देते थे। उनके नेतृत्व में कई युवा कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिला और अनेक लोगों के जीवन की दिशा बदली।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दादा की सादगी, अनुशासन और समर्पण आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा, “आज जब हम उन्हें याद करते हैं, तो सिर्फ उनके जाने का दुख नहीं, बल्कि उनके विचारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी महसूस करते हैं। कार्यक्रम के दौरान मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी दादा को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उनके साथ जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि दादा हमेशा जमीन से जुड़े रहे और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे।
मुरलीधर मोहोल ने कहा कि दादा की विरासत को जीवित रखने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज और राष्ट्र के लिए कार्य किया जाए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे दादा के जीवन से प्रेरणा लें और ईमानदारी व निष्ठा के साथ सार्वजनिक जीवन में योगदान दें।
उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा, “दादा भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार, उनके मूल्य और उनका संघर्ष हमेशा हमारे साथ रहेगा। उनकी कमी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती, लेकिन उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। इस भावुक मौके पर पूरे कार्यक्रम में शोक और सम्मान का माहौल रहा। दादा के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए नेताओं ने एक स्वर में कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।
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