महाराष्ट्र

उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग और केंद्र पर हमला, ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए सवाल

Kavita2
4 Oct 2026 5:00 PM IST
उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग और केंद्र पर हमला, ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए सवाल
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मुंबई। शिवसेना (UBT) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। मुंबई में आयोजित विरोध मार्च के दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लिया। अपने संबोधन में उन्होंने एडॉल्फ हिटलर का जिक्र करते हुए कथित तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही।

उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया। बड़ी संख्या में लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग भी उठाई।

विरोध मार्च में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कई नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर चलने की अपील की गई थी। विरोध का मुख्य मुद्दा महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और उससे जुड़ी कथित गड़बड़ियां रहीं।

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार ऐसे आरोपों को खारिज करते रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक संचालित किए जाने की बात कही गई है।

अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने एडॉल्फ हिटलर का उल्लेख करते हुए कथित तानाशाही को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और मनमाने तरीके से काम करने वाली व्यवस्था का विरोध किया जाएगा। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ के नारे का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि देश में तानाशाही पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और उन्हें मिलने वाले कानूनी संरक्षण पर सवाल उठाए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है।

विरोध प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची का SIR भी रहा। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और वास्तविक मतदाताओं का मताधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

राज ठाकरे ने भी प्रदर्शन में SIR को रद्द करने की मांग उठाई। उन्होंने मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम बाहर होने पर सवाल खड़े किए और राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर संयुक्त रूप से आवाज उठाने की अपील की।

वहीं चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में कथित हेरफेर के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार कर चुके हैं। चुनाव आयोग का कहना रहा है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है।

उद्धव ठाकरे ने SIR के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य अवैध मतदाताओं की पहचान करना है तो इससे जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा।

मुंबई में हुए इस प्रदर्शन को ‘विराट गर्जना मोर्चा’ नाम दिया गया। मार्च दक्षिण मुंबई में मेट्रो सिनेमा क्षेत्र से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के पास पहुंचा, जहां नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करना भी महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बना। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर अपने-अपने सवाल उठाए। विरोध प्रदर्शन में शामिल विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कहा कि राजनीतिक लड़ाई किसी एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी है। उन्होंने समर्थकों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहने की अपील की।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव होने से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की सत्यता को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है और कहा है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का नियमित हिस्सा है।

प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठी। उद्धव ठाकरे ने उनकी भूमिका पर सवाल खड़े किए, जबकि राज ठाकरे ने SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की।

इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को नियमानुसार बता रहा है।

मुंबई में रविवार का प्रदर्शन इसी राजनीतिक टकराव का बड़ा रूप रहा। उद्धव ठाकरे ने हिटलर का उदाहरण देते हुए कथित तानाशाही के खिलाफ संघर्ष की बात कही और मोदी-शाह के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक हमला बोला। वहीं राज ठाकरे ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग दोहराई। आने वाले दिनों में SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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