महाराष्ट्र

RCom केस में बढ़ीं मुश्किलें CBI ने दाखिल की चार्जशीट

Ratna Netam
3 Oct 2026 4:35 PM IST
RCom केस में बढ़ीं मुश्किलें CBI ने दाखिल की चार्जशीट
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मुंबई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े कथित 3,750 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में मुंबई की विशेष CBI अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की है। इसमें RCom के अलावा रिलायंस ADA ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के तत्कालीन वाइस प्रेसिडेंट विश्वास जोशी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल को आरोपी बनाया गया है।
CBI के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित अपराधों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।
यह मामला LIC की ओर से RCom के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) में किए गए निवेश से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2012 में LIC ने RCom की ओर से जारी 1,500 करोड़ रुपये के NCD को सब्सक्राइब किया था। CBI का दावा है कि इस निवेश को हासिल करने के दौरान कथित तौर पर गलत जानकारी और तथ्यों की गलत प्रस्तुति की गई।
जांच में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि NCD के माध्यम से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया। CBI के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा कथित रूप से रिलायंस ADA ग्रुप की दूसरी कंपनियों की ओर डायवर्ट किया गया। एजेंसी इसी कथित फंड डायवर्जन और निवेश प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले में LIC के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया। CBI ने अपनी चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि संबंधित निवेश से LIC को वित्तीय नुकसान हुआ।
CBI की यह कार्रवाई रिलायंस ADA ग्रुप की विभिन्न कंपनियों से जुड़े मामलों की व्यापक जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, LIC और अन्य संस्थानों की शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और अन्य समूह कंपनियों से जुड़े कई मामले दर्ज किए हैं। जुलाई में सरकार ने बताया था कि RCom सहित संबंधित समूह कंपनियों के खिलाफ विभिन्न शिकायतों पर सात FIR दर्ज की गई थीं।
बाद में जांच का दायरा और बढ़ा। CBI की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच ने विभिन्न मामलों में कंपनी के तत्कालीन और पूर्व अधिकारियों की भूमिकाओं की जांच की। मई 2026 में एजेंसी ने RCom से जुड़े एक मामले में मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु में सात ठिकानों पर तलाशी भी ली थी। ये ठिकाने कंपनी में 2015 से 2017 के दौरान काम कर चुके तत्कालीन CEO, CFO और निदेशकों से जुड़े थे।
RCom से जुड़े एक अन्य 1,200 करोड़ रुपये के कथित ऋण धोखाधड़ी मामले में CBI ने अगस्त 2026 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। उस चार्जशीट में भी अमिताभ झुनझुनवाला का नाम शामिल था। जांच एजेंसी ने उस मामले में आरोप लगाया था कि कथित आपराधिक साजिश के तहत भारतीय स्टेट बैंक से RCom और रिलायंस इंफ्राटेल के लिए टर्म लोन हासिल किया गया।
इसी तरह रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) मामले में भी जांच एजेंसी ने कार्रवाई की है। 1 अक्टूबर को CBI ने RHFL से जुड़े मामले में दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 11 आरोपियों को नामजद किया गया। एजेंसी का आरोप है कि RHFL द्वारा उधार लिए गए 7,429.16 करोड़ रुपये को मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से रिलायंस ADA ग्रुप की विभिन्न कंपनियों की ओर कथित तौर पर डायवर्ट किया गया।
CBI इससे पहले रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड मामले में भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जुलाई में दाखिल पहली चार्जशीट में सात आरोपियों को नामजद किया गया था। उस मामले में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को करीब 4,097 करोड़ रुपये के कथित नुकसान का आरोप है।
इन मामलों में CBI का मुख्य फोकस इस बात की जांच पर है कि वित्तीय संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से हासिल की गई रकम का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्यों के अनुसार किया गया या उसे दूसरी संस्थाओं की ओर स्थानांतरित किया गया। एजेंसी विभिन्न कंपनियों के अधिकारियों के साथ उन सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच रही है, जिनकी निर्णय प्रक्रिया इन लेनदेन से जुड़ी थी।
RCom के ताजा मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया विशेष CBI अदालत में चलेगी। चार्जशीट दाखिल करना दोषसिद्धि नहीं है; आरोपों की सत्यता और आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत साक्ष्यों और पक्षों की दलीलों के आधार पर करेगी।
रिलायंस ADA ग्रुप से जुड़े मामलों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की भी निगरानी है। CBI पहले कह चुकी है कि संबंधित मामलों में अन्य अधिकारियों, कंपनियों और लोक सेवकों की भूमिका की जांच जारी है तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
ताजा चार्जशीट के साथ LIC के निवेश से जुड़े RCom मामले में जांच अब अदालत की प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। CBI ने कंपनी और तीन अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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