महाराष्ट्र

राज ठाकरे के लिए बढ़ी मुश्किल फोटो विवाद ने बदला महाराष्ट्र का समीकरण

Ratna Netam
1 Sept 2026 9:22 PM IST
राज ठाकरे के लिए बढ़ी मुश्किल फोटो विवाद ने बदला महाराष्ट्र का समीकरण
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महाराष्ट्र : राजनीति में एक बार फिर नए विवाद ने हलचल बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाने को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और बीजेपी के बीच तकरार तेज हो गई है। इस विवाद का असर आने वाले समय में स्थानीय राजनीति और खासकर **कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC)** के सियासी समीकरणों पर पड़ सकता है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर उठे विवाद के बाद बीजेपी ने MNS पर निशाना साधा है। वहीं राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी अपने रुख पर कायम नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस विवाद का असर महाराष्ट्र में बने नए राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा और क्या राज ठाकरे का 'भगवा साथ' कमजोर होगा।
फोटो विवाद से शुरू हुई सियासी लड़ाई
मामला उस समय सामने आया जब पुणे के एक सरकारी संस्थान में छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाए जाने पर आपत्ति जताई गई। MNS नेता अमित ठाकरे ने इस पर विरोध दर्ज कराया और उनके समर्थकों द्वारा पीएम मोदी की तस्वीर हटाने का मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस ने अमित ठाकरे और कुछ MNS कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया।
बीजेपी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक अपरिपक्वता बताते हुए MNS पर हमला बोला। वहीं MNS की ओर से कहा गया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि तस्वीर लगाने के तरीके को लेकर था।
KDMC चुनावों से पहले बढ़ी चिंता
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका की राजनीति में बीजेपी और MNS के बीच नजदीकियों को लेकर लंबे समय से चर्चा रही है। राज ठाकरे की पार्टी ने पिछले कुछ समय में हिंदुत्व और भगवा राजनीति के मुद्दों पर अपना रुख मजबूत किया है। ऐसे में बीजेपी के साथ संभावित तालमेल को लेकर भी राजनीतिक कयास लगाए जाते रहे हैं।
अब पीएम मोदी की तस्वीर वाले विवाद के बाद दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्थानीय निकाय चुनावों से पहले छोटे विवाद भी बड़े गठबंधन समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
बीजेपी के लिए क्यों अहम है मामला?
महाराष्ट्र में बीजेपी लंबे समय से हिंदुत्व के मुद्दे पर अपनी राजनीति करती रही है। राज ठाकरे की MNS भी मराठी अस्मिता के साथ-साथ हिंदुत्व के मुद्दों पर सक्रिय रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच किसी भी तरह का टकराव राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाता है।
बीजेपी चाहती है कि हिंदुत्व वोटों का बंटवारा कम हो, जबकि MNS अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने की कोशिश करती है।
राज ठाकरे की रणनीति पर नजर
राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं। वह समय-समय पर बड़े मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। पार्टी की राजनीति में मराठी हित, क्षेत्रीय मुद्दे और हिंदुत्व प्रमुख विषय रहे हैं।
पीएम मोदी की तस्वीर विवाद में भी MNS ने अपने कार्यकर्ताओं के रुख का समर्थन किया है। हालांकि, पार्टी के लिए चुनौती यह है कि वह राजनीतिक विरोध और संभावित सहयोग के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।
क्या टूटेगा 'भगवा साथ'?
महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन और समीकरण तेजी से बदलते रहे हैं। शिवसेना में हुई टूट के बाद राज्य की राजनीति में कई नए गठजोड़ देखने को मिले हैं। ऐसे में MNS और बीजेपी के बीच किसी भी विवाद को गंभीरता से देखा जा रहा है।
हालांकि अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि दोनों दलों के बीच कोई बड़ा राजनीतिक रिश्ता खत्म हो रहा है। लेकिन इस विवाद ने दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच बहस जरूर तेज कर दी है।
आने वाले दिनों में साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पीएम मोदी की फोटो हटाने का मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। MNS नेताओं पर दर्ज मामले के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि बीजेपी और MNS इस विवाद को किस तरह संभालते हैं। अगर दोनों दल अपने मतभेदों को दूर कर लेते हैं तो KDMC जैसे चुनावी मैदान में समीकरण अलग रह सकते हैं, लेकिन अगर विवाद बढ़ता है तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।
महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक विवाद है या फिर आने वाले चुनावों से पहले भगवा खेमे में नई दरार की शुरुआत।
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