- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- TDRF जवान विकास गोरे...

ठाणे (महाराष्ट्र)। आपदाओं के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक रेस्क्यू वर्कर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (TDRF) के स्थायी सदस्य विकास लाहू गोरे (31) की मोटरसाइकिल कथित तौर पर मुंबई-नासिक हाईवे पर एक गड्ढे से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल विकास गोरे की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिवार, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ सड़क व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
मृतक विकास गोरे ठाणे जिले के शाहपुर तालुका के बामाने गांव के रहने वाले थे। वे TDRF में स्थायी सदस्य के रूप में कार्यरत थे और आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। वर्षों से वे बाढ़, दुर्घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में लोगों की मदद करते आ रहे थे। उनके साथी उन्हें एक समर्पित और साहसी रेस्क्यू कर्मी के रूप में याद कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, हादसे के समय विकास गोरे ड्यूटी पर जा रहे थे। परिवार के सदस्यों और उनके साथ काम करने वाले लोगों के मुताबिक, वह अपने नियमित कार्य के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे। इसी दौरान मुंबई-नासिक हाईवे पर शाहपुर क्षेत्र में भारंगी नदी के पुल के पास उनकी बाइक दुर्घटना का शिकार हो गई।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विकास गोरे मुंबई-नासिक हाईवे पर ठाणे की दिशा में जा रहे थे। इसी दौरान उनकी मोटरसाइकिल कथित तौर पर सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे से टकरा गई। अचानक झटका लगने के कारण बाइक पर उनका नियंत्रण नहीं रहा। इसके बाद वे सड़क पर गिर गए और फिसलते हुए डिवाइडर से जा टकराए।
हादसा इतना गंभीर था कि विकास गोरे के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और उनके विभाग के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
विकास गोरे अपने पीछे पत्नी और सवा साल की जुड़वां बेटियों को छोड़ गए हैं। कम उम्र में परिवार के मुख्य सदस्य की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के लोगों का कहना है कि विकास ने हमेशा दूसरों की जान बचाने का काम किया, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण उनकी खुद की जिंदगी चली गई।
परिवार और उनके साथियों ने इस हादसे को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि सड़क पर मौजूद गड्ढों की समय पर मरम्मत की जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सड़क की स्थिति सुधारने और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
विकास गोरे के सहकर्मियों ने बताया कि वे अपने काम के प्रति बेहद जिम्मेदार थे। आपदा की स्थिति में वे बिना अपनी सुरक्षा की चिंता किए लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे। उनके निधन को TDRF और बचाव कार्य से जुड़े पूरे समुदाय के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है।
मुंबई-नासिक हाईवे पर सड़क की खराब स्थिति और गड्ढों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। मानसून के दौरान कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढों की समस्या बढ़ जाती है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे जैसे व्यस्त मार्गों पर सड़क की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लापरवाही की जांच की जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
विकास गोरे की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रखरखाव के मुद्दे को सामने ला दिया है। जो व्यक्ति वर्षों तक दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए तत्पर रहा, उसकी मौत एक सड़क हादसे में होना कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल परिवार अपने प्रिय सदस्य को खोने के गम में है और साथ ही व्यवस्था से जवाब की उम्मीद कर रहा है।





